मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच ऑयल ठिकानों में आग लगने की वजह से, वायुमंडल में छोड़े गए उत्सर्जन अम्लीय वर्षा के रूप में वापस खाड़ी क्षेत्र में लौट आते हैं। इससे पानी का रासायनिक संतुलन अपरिवर्तनीय रूप से बदल जाता है और वनस्पति तथा जीव-जंतुओं को नष्ट किया जाता है, मिस्र के विशेषज्ञ और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के पर्यवेक्षक मुस्तफ़ा शेरबिनी ने Sputnik से कहा।
शेरबिनी के अनुसार, खाड़ी की भौगोलिक विशेषताएं इस स्थिति को और भी गंभीर बना देती हैं। यह आंशिक रूप से भूमि से घिरा हुआ जलक्षेत्र है, जहाँ पानी का आदान-प्रदान बेहद धीमी गति से होता है।
"ऐसी बंद जल प्रणाली में विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकलते, बल्कि दशकों तक जमा होते रहते हैं," विशेषज्ञ ने कहा।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि रसायनों से लदे जहाज़ों से जुड़ी किसी भी दुर्घटना के परिणामस्वरूप खाड़ी में दीर्घकालिक आपदा उत्पन्न हो सकती है। इसका अर्थ यह है कि लोग वास्तव में उसी संसाधन को प्रदूषित कर रहे हैं, जिस पर पूरे क्षेत्र की आबादी का जीवन और स्वास्थ्य निर्भर करता है।
"करीब 10 करोड़ लोगों के लिए यह खाड़ी जीवन का एकमात्र स्रोत है, और उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। अब यह सिर्फ़ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है," उन्होंने रेखांकिट किया।