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सर्वोच्च अदालत ने केंद्र से जम्मू कश्मीर को दुबारा राज्य बनाने की समय अवधि मांगी

CC BY-SA 3.0 / KennyOMG / View of the Pahalgam Valley, located in the northeastern part of the Kashmir valley in Jammu and Kashmir, India.
View of the Pahalgam Valley, located in the northeastern part of the Kashmir valley in Jammu and Kashmir, India. - Sputnik भारत, 1920, 29.08.2023
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भारत की सर्वोच्च अदालत वर्तमान में अनुच्छेद 370 को खत्म करने को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिसके अंतर्गत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया था।
सप्रीम कोर्ट में मंगलवार को केंद्र सरकार ने सूचित किया कि जम्मू-कश्मीर को लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करना एक अस्थायी उपाय है और भविष्य में हालात सामान्य होने पर जम्मू-कश्मीर का केंद्र शासित प्रदेश के रूप में दर्जा आखिर में एक राज्य का हो जाएगा।
इसके जवाब में अदालत ने जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए समय सीमा मांगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि यह कितना अस्थायी है और जम्मू-कश्मीर में चुनाव कब होंगे, जिस पर सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने जवाब दिया कि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उपाय किए जा रहे हैं।
"इसका अंत होना ही चाहिए... हमें विशिष्ट समय सीमा दीजिए कि आप वास्तविक लोकतंत्र कब बहाल करेंगे। हम इसे रिकॉर्ड करना चाहते हैं," पीठ ने कहा, और मेहता और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को राजनीतिक कार्यपालिका से निर्देश लेने और अदालत में वापस आने को कहा।
सॉलिसिटर जनरल ने निर्देश लेने के बाद पीठ को सूचित किया कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, जबकि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में बरकरार रखा जाएगा इसके साथ साथ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह 31 अगस्त को अदालत में इस राजनीतिक मुद्दे पर एक विस्तृत बयान देगा।
The view of the frontier from the Indian border town of Kargil, in northern most Jammu and Kashmir,  battered  in 1999 by Pakistani artillery shells, is seen Wednesday, June 19, 2001. - Sputnik भारत, 1920, 02.08.2023
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"निर्देश यह है कि UT एक स्थायी विशेषता नहीं है। लेकिन मैं परसों एक सकारात्मक बयान दूंगा। लद्दाख UT ही रहेगा।" SG ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था को छोड़कर, अन्य सभी शक्तियां जम्मू-कश्मीर के पास हैं," SG मेहता ने कहा।  
इस पीठ की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉ. डी.वाई.चंद्रचूड़ कर रहे थे और इसमें जस्टिस एसके कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत शामिल हैं।
2019 में, केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटा दिया, जिसके कारण जम्मू और कश्मीर दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित हो गया।
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