विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

पृथ्वी ने पहली बार अंतरिक्ष में 1 अरब KM से अधिक दूरी से प्राप्त किया लेजर संदेश

© AFP 2023 MARIANA SUAREZThis long-exposure image shows a trail of a group of SpaceX's Starlink G6-27 satellites passing over Uruguay, with part of the Milky Way and planet Venus (L) in the frame, as seen from the countryside some 185 km north of Montevideo near Capilla del Sauce, Florida Department, at twilight early on November 12, 2023.
This long-exposure image shows a trail of a group of SpaceX's Starlink G6-27 satellites passing over Uruguay, with part of the Milky Way and planet Venus (L) in the frame, as seen from the countryside some 185 km north of Montevideo near Capilla del Sauce, Florida Department, at twilight early on November 12, 2023. - Sputnik भारत, 1920, 23.11.2023
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वर्तमान में उल्का पिंड साइकी के रास्ते में जा रहे साइकी अंतरिक्ष यान ने रिकॉर्ड तोड़ दूरी से एक लेजर बीम संदेश पृथ्वी पर सफलतापूर्वक प्रेषित किया है।
डीप स्पेस ऑप्टिकल कम्युनिकेशंस (DSOC) से यह उपलब्धि प्राप्त की गई है, जो साइकी यान पर उपस्थित है।
इस मिशन में DSOC से लैस यान पृथ्वी से लगभग 16 मिलियन किलोमीटर दूर पहुंच चुका है, जहां से यह संदेश प्रेषित किए गया। ये दूरी लगभग पृथ्वी और चंद्रमा के मध्य की दूरी का चालीस गुना है।
14 नवंबर को साइकी अंतरिक्ष यान ने कैलिफोर्निया में पालोमर वेधशाला के हेल टेलीस्कोप के साथ एक संचार लिंक स्थापित किया। इस लिंक को पृथ्वी तक यात्रा करने में लगभग 50 सेकंड का समय लगा। यह संदेश परीक्षण डेटा के साथ एन्कोड किए गए एक निकट-अवरक्त लेजर बीम की सहायता से भेजा गया।
फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से 13 अक्टूबर को इस अंतरिक्ष यान को रवाना किया गया था। अंतरिक्ष में जाने के बाद से यह यान लगातार पृथ्वी पर लेजर बीम की सहायता से संदेश भेज रहा है।

"पहली रोशनी प्राप्त करना एक जबरदस्त उपलब्धि है। साइकी पर सवार DSOC के फ्लाइट ट्रांसीवर से गहरे अंतरिक्ष लेजर फोटॉनों का ग्राउंड उपकरण द्वारा सफलतापूर्वक पता लगाया गया था। हम डेटा भी दे सकते हैं, जिसका अर्थ है कि हम गहरे अंतरिक्ष से 'प्रकाश के टुकड़ों' का आदान-प्रदान कर सकते हैं," जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में DSOC के प्रोजेक्ट टेक्नोलॉजिस्ट अबी बिस्वास ने कहा।

अंतरिक्ष विज्ञान में कॉम्स लिंक की सफल स्थापना को 'पहली रोशनी' के रूप में जाना जाता है।
साइकी अंतरिक्ष यान उल्का पिंड साइकी का पता लगा कर अध्ययन करने के लिए अंतरिक्ष में भेज गया है। इस उल्कापिंड के अध्ययन से ग्रह निर्माण के इतिहास की जानकारी जुटाई जा सकती है।
Russian cosmonauts Sergey Prokopyev and Dmitry Petelin have returned to the International Space Station (ISS) after a spacewalk that lasted more than seven hours - Sputnik भारत, 1920, 24.10.2023
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इस परियोजना में यह यान अपने अंतिम गंतव्य स्थान तक पहुंचने के दौरान रास्ते में तेजी से दूर के स्थानों से लेजर सिग्नल भेजेगा और प्राप्त भी करेगा।
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