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सदियों पुरानी तकनीक पर बना भारतीय पोत यात्रा पर निकला

© Photo : X/@narendramodiINSV Kaundinya
INSV Kaundinya - Sputnik भारत, 1920, 29.12.2025
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सैकड़ों वर्ष पुरानी भारतीय नौवहन की परंपरा को एक बार फिर पुनर्जीवित किया गया है। प्राचीन भारतीय तकनीक पर आधारित पाल चलित पोत INSV Kaundinya ने 29 दिसंबर को गुजरात के पोरबंदर से ओमान के मस्कट बंदरगाह की अपनी पहली यात्रा प्रारंभ की। इस पोत में चार अधिकारी और 13 नौसैनिक सवार हैं।
INSV कौंडिन्य की डिज़ाइन प्रसिद्ध अजंता गुफाओं में चित्रित 5वीं सदी के एक व्यापारिक पोत पर आधारित है। इसे बनाने में सदियों पुरानी पोत निर्माण तकनीक से प्रमुख रूप से प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग किया गया है। कौडिन्य भारत की स्वदेशी पोतनिर्माण की विरासत, नौवहन कौशल और सामुद्रिक विज्ञान का प्रतीक है।
कौंडिन्य नाम का चुनाव पहली शताब्दी के एक साहसी भारतीय नाविक के नाम पर किया गया जिसने कंबोडिया तक की समुद्री यात्रा की थी और वहां की राजकुमारी से विवाह किया था। यह पोत 19.6 मीटर लंबा है और इसे सिली गईं बड़ी-बड़ी पालों या पतवारों के सहारे चलाया जाता है।
भारतीय नौसेना ने इससे पहले तारिणी नाम का भी पोत बनाया है जिससे लंबी समुद्री यात्राएं की गई हैं। इस पोत की पहली यात्रा के तौर पर ओमान का चुनाव दोनों देशों के बीच समुद्र के रास्ते प्राचीन व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर किया गया है।
भारत अपनी नौसैनिक कूटनीति के तहत हिंद महासागर क्षेत्र के दूसरे देशों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है। भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में समुद्री लुटेरों के खतरे को देखते हुए लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखती है ताकि व्यापार निर्बाध रूप से चलता रहे। साथ ही भारतीय नौसेना किसी प्राकृतिक आपदा में सबसे पहले पहुंचकर राहत और बचाव कार्य प्रारंभ करने को तत्पर रहती है।
Armoured division of Indian army marches through the ceremonial Rajpath boulevard during India's Republic Day celebrations, in New Delhi, India, Wednesday, Jan. 26, 2022.  - Sputnik भारत, 1920, 29.12.2025
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