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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के रक्षा बजट में बड़ी वृद्धि, सेनाओं को आधुनिक बनाने पर ज़ोर

© AP Photo / Manish SwarupArmoured division of Indian army marches through the ceremonial Rajpath boulevard during India's Republic Day celebrations, in New Delhi, India, Wednesday, Jan. 26, 2022.
Armoured division of Indian army marches through the ceremonial Rajpath boulevard during India's Republic Day celebrations, in New Delhi, India, Wednesday, Jan. 26, 2022.  - Sputnik भारत, 1920, 01.02.2026
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद आए पहले बजट में भारतीय सेनाओं को आधुनिक बनाने के लिए 2,19 लाख करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। सेनाओं के लिए नए अस्त्र-शस्त्र और उपकरण खरीदने के लिए स्वीकृत किया गया यह धन पिछले साल की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। इसमें से 1.39 लाख करोड़ रुपए स्वदेशी रक्षा उद्योगों से खरीददारी में खर्च किए जाएंगे।
रक्षा मंत्रालय को इस बार के बजट में 7.85 लाख करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक हैं।
रक्षा मंत्रालय का बजट वित्त वर्ष 2026-27 के कुल बजट का 14.67 प्रतिशत है और यह सभी मंत्रालयों में सर्वाधिक है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण की गति बढ़ाई गई है और बजट से पता चलता है कि भारत इसे आगे भी जारी रखेगा।
आगामी वित्तीय वर्ष में भारतीय सेनाओं के लिए लड़ाकू जेट, सबमरीन, तोपें, ड्रोन, विशेष वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के उपकरण जैसे मंहगे सौदे होने की संभावना है। रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह बड़ी वृद्धि रणनीतिक रूप से अनिवार्य थी। बीते दिसंबर तक रक्षा मंत्रालय ने 2.10 लाख करोड़ रुपए के रक्षा सौदों को अंतिम रूप दिया है और 3.50 लाख करोड़ के अन्य सौदों की प्रक्रिया आरंभ की है।
रक्षा मंत्रालय अगले वित्तीय वर्ष में भी रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के लिए काम करता रहेगा। नए उपकरणों की 75 प्रतिशत खरीद स्वदेशी उद्योग से की जाएगी ताकि विदेशों पर निर्भरता को कम किया जा सके।

मौजूदा उपकरणों को चलाने और उनकी सार-संभाल के लिए 1,58,296.98 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इस रकम का प्रयोग गोला-बारूद और हिस्से-पुर्ज़ों के भंडारण में किया जाएगा ताकि रोजमर्रा के सैनिक कामकाज़ को सुचारू रूप से चलाया जा सके।

सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर संपर्क के लिए आवश्यक ढांचे के निर्माण के लिए सीमा सड़क संगठन को 7394 करोड़ रुपए दिए गए हैं ताकि सड़कों, सुरंगों, पुलों, एयरफील्ड जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम चलते रहें। नई तकनीकों और उपकरणों के लिए रिसर्च के लिए डीआरडीओ के दिए जाने वाले बजट को बढ़ाकर 29100.25 करोड़ रुपए किया गया है।
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