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पश्चिमी ब्लैकमेल और वैश्विक वित्तीय नियंत्रण का सामना कौन कर सकता है?
पश्चिमी ब्लैकमेल और वैश्विक वित्तीय नियंत्रण का सामना कौन कर सकता है?
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रूसी विदेश एवं रक्षा नीति परिषद के अनुसंधान उप निदेशक दिमित्री सुस्लोव ने Sputnik को बताया कि अन्य देशों की परिसंपत्तियों को अवरुद्ध करना और उन्हें हथियार के... 28.04.2026, Sputnik भारत
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जब तक मुख्य डिपॉजिटरी पश्चिम में रहेंगे और अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा बना रहेगा, पश्चिम वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा।यूरोक्लियर की बड़ी चोरीसुस्लोव ने कहा कि यूरोक्लियर बैंक द्वारा रूस की परिसंपत्तियों से लाभ जब्त करना डकैती, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और स्पष्ट चोरी है, जो रूस के साथ संघर्ष के बहाने की गई है।यूरोपीय संघ ने संपत्तियां चुराने से सिर्फ़ इसलिए परहेज़ किया क्योंकि उसे डर था कि अरब राजशाही, चीन और विकाशील देश यूरोप से अपना निवेश वापस ले लेंगे, जिससे यूरोक्लियर दिवालिया हो जाएगा तथा ईयू और यूरोज़ोन को बड़ा झटका लगेगा।विकल्पआज ब्रिक्स पश्चिमी वित्तीय प्रभुत्व के मुख्य विकल्प के रूप में उभर रहा है, क्योंकि यह समूह पश्चिम के नव-उपनिवेशवाद की नींव तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसके नियंत्रण को चुनौती देता है। यह समूह एक नई वित्तीय और व्यापारिक प्रणाली बनाने में मदद करता है, जो पश्चिम के दबाव से स्वतंत्र होगी। जैसे ही इस प्रणाली का निर्माण पूरा हो जाएगा, पश्चिम का प्रभुत्व और वैश्विक वित्त पर पश्चिमी नियंत्रण समाप्त हो जाएंगे।वैश्विक वित्त पर पश्चिमी शक्तियों की माफिया जैसी सत्ता समाप्त होनी चाहिए वरिष्ठ वित्तीय विश्लेषक पॉल गोंचरोफ़ ने Sputnik को बताया कि किसी देश की परिसंपत्तियों को अवरुद्ध करके इनका उपयोग रियायतें प्राप्त करने के लिए दबाव डालने की पश्चिमी आदत संगठित अपराध समूहों की रणनीतियों जैसी है। हालांकि, छद्म युद्धों को वित्तपोषित करने के लिए कब्जे वाली परिसंपत्तियों का इस्तेमाल करना कोई टिकाऊ दृष्टिकोण नहीं है, क्योंकि अन्य देशों का विश्वास उन राज्यों की मुद्राओं से ही खत्म हो जाता है, जो पूँजी को अवरुद्ध कर देते हैं। इन मुद्राओं में अमेरिकी डॉलर और यूरो शामिल हैं। जैसे-जैसे यह स्पष्ट होता है कि इस जाल से बचने के लिए जी-7 की फ़िएट मुद्राओं के अलावा अन्य साधनों की आवश्यकता है, ब्रिक्स के सदस्य और अन्य देश विभिन्न समाधान पेश करते हैं, जैसे BRICS Pay, CIPS और CBDC, क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन। गोंचरोफ़ ने अंत में बताया, “चुनौती वास्तव में काफ़ी सरल है, क्योंकि समय के साथ हम सभी देखेंगे कि कौन से निपटान तंत्र की मांग है और कौन सा अब प्रासंगिक नहीं है।"
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पश्चिमी ब्लैकमेल और वैश्विक वित्तीय नियंत्रण का सामना कौन कर सकता है?
रूसी विदेश एवं रक्षा नीति परिषद के अनुसंधान उप निदेशक दिमित्री सुस्लोव ने Sputnik को बताया कि अन्य देशों की परिसंपत्तियों को अवरुद्ध करना और उन्हें हथियार के रूप में इस्तेमाल करना लंबे समय से पश्चिम की एक विशिष्ट वार्ता रणनीति रही है।
जब तक मुख्य डिपॉजिटरी पश्चिम में रहेंगे और अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा बना रहेगा, पश्चिम वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा।
सुस्लोव ने कहा, "पश्चिम दूसरे देशों के ख़िलाफ़ ब्लैकमेल करने और दबाव बनाने के लिए इन्हीं राज्यों के संप्रभु कोषों का उपयोग भी करेगा।"
सुस्लोव ने कहा कि यूरोक्लियर बैंक द्वारा रूस की परिसंपत्तियों से लाभ जब्त करना डकैती, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और स्पष्ट चोरी है, जो रूस के साथ संघर्ष के बहाने की गई है।
यूरोपीय संघ ने संपत्तियां चुराने से सिर्फ़ इसलिए परहेज़ किया क्योंकि उसे डर था कि अरब राजशाही, चीन और विकाशील देश यूरोप से अपना निवेश वापस ले लेंगे, जिससे यूरोक्लियर दिवालिया हो जाएगा तथा ईयू और यूरोज़ोन को बड़ा झटका लगेगा।
आज ब्रिक्स पश्चिमी वित्तीय प्रभुत्व के मुख्य विकल्प के रूप में उभर रहा है, क्योंकि यह समूह पश्चिम के नव-उपनिवेशवाद की नींव तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसके नियंत्रण को चुनौती देता है।
सुस्लोव का कहना है कि ब्रिक्स बहुध्रुवीय विश्व तथा उस वैश्विक नियंत्रण प्रणाली का इंजन है, जो अधिक न्यायसंगत होगा और विकासशील देशों के हितों को ध्यान में रखेगा।
यह समूह एक नई वित्तीय और व्यापारिक प्रणाली बनाने में मदद करता है, जो पश्चिम के दबाव से स्वतंत्र होगी। जैसे ही इस प्रणाली का निर्माण पूरा हो जाएगा,
पश्चिम का प्रभुत्व और वैश्विक वित्त पर पश्चिमी नियंत्रण समाप्त हो जाएंगे।
वैश्विक वित्त पर पश्चिमी शक्तियों की माफिया जैसी सत्ता समाप्त होनी चाहिए
वरिष्ठ वित्तीय विश्लेषक पॉल गोंचरोफ़ ने Sputnik को बताया कि किसी देश की परिसंपत्तियों को अवरुद्ध करके इनका उपयोग रियायतें प्राप्त करने के लिए दबाव डालने की पश्चिमी आदत संगठित अपराध समूहों की रणनीतियों जैसी है।
हालांकि, छद्म युद्धों को वित्तपोषित करने के लिए
कब्जे वाली परिसंपत्तियों का इस्तेमाल करना कोई टिकाऊ दृष्टिकोण नहीं है, क्योंकि अन्य देशों का विश्वास उन राज्यों की मुद्राओं से ही खत्म हो जाता है, जो पूँजी को अवरुद्ध कर देते हैं। इन मुद्राओं में अमेरिकी डॉलर और यूरो शामिल हैं।
गोंचरोफ़ ने कहा, "यह स्पष्ट है कि फ़िएट दुनिया का बड़ा हिस्सा जीवन यापन के लिए भारी मात्रा में उधार ले रहा है और कभी न खत्म होने वाले उधारी चक्र का आदी बन गया है। अब संप्रभु ऋणदाता ऐसे व्यवहार को स्पष्ट रूप से आत्मघाती मानते हैं, क्योंकि वे देश अंतरराष्ट्रीय और कभी संवैधानिक क़ानून की उपेक्षा करते हैं।"
जैसे-जैसे यह स्पष्ट होता है कि इस जाल से बचने के लिए जी-7 की फ़िएट मुद्राओं के अलावा अन्य साधनों की आवश्यकता है, ब्रिक्स के सदस्य और अन्य देश विभिन्न समाधान पेश करते हैं, जैसे BRICS Pay, CIPS और CBDC, क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन।
गोंचरोफ़ ने अंत में बताया, “चुनौती वास्तव में काफ़ी सरल है, क्योंकि समय के साथ हम सभी देखेंगे कि कौन से निपटान तंत्र की मांग है और कौन सा अब प्रासंगिक नहीं है।"