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गुप्त हिरण टोही और कुत्तों के कमांडो: द्वितीय विश्व युद्ध के अनसुने सोवियत पशु नायक
गुप्त हिरण टोही और कुत्तों के कमांडो: द्वितीय विश्व युद्ध के अनसुने सोवियत पशु नायक
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जहाँ सैनिक लड़ते थे, वहाँ जानवर गोला-बारूद पहुंचाते, घायलों को बचाते, हवाई हमलों की चेतावनी देते और तोपखाने खींचते। इससे यह साबित हुआ कि विजय केवल मानव नहीं, बल्कि पशु साहस पर भी निर्भर थी।
2026-05-09T16:35+0530
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महान देशभक्ति युद्ध के दौरान, कुत्तों और बिल्लियों, घोड़ों और कबूतरों के साथ-साथ कई दूसरे जानवरों ने भी सैनिकों के साथ मिलकर मुश्किल काम किए।सोवियत संघ का महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध (22 जून 1941 - 9 मई 1945) सोवियत जनता के लिए द्वितीय विश्वयुद्ध के वर्षों में अपने देश के अस्तितव की रक्षा को लेकर सब से बड़ी घटना के रूप में दुनिया के इतिहास में जाना जाता है, जिसमें सोवियत संघ ने नाजी जर्मनी और उसके सहयोगियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। रूस में 9 मई को विजय दिवस मनाया जाता है, जो द्वितीय विश्व युद्ध में नाज़ी जर्मनी पर जीत का प्रतीक है।
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रूस , सोवियत संघ, द्वितीय विश्व युद्ध, महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध, पशु
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गुप्त हिरण टोही और कुत्तों के कमांडो: द्वितीय विश्व युद्ध के अनसुने सोवियत पशु नायक
जब सैनिक लड़ते थे, तब जानवर गोला-बारूद पहुंचाते थे, घायलों को बचाते थे, हवाई हमलों की चेतावनी देते थे और तोपखाने खींचते थे। इससे यह साबित हुआ कि विजय केवल मानव नहीं, बल्कि पशु साहस पर भी निर्भर थी।
महान देशभक्ति युद्ध के दौरान, कुत्तों और बिल्लियों, घोड़ों और कबूतरों के साथ-साथ कई दूसरे जानवरों ने भी सैनिकों के साथ मिलकर मुश्किल काम किए।
उदाहरण के लिए, कुल मिलाकर, युद्ध के दौरान, लगभग 68,000 कुत्तों को सेना में भर्ती किया गया था, जो अलग-अलग तरह के कार्य करते थे। इनमें सैपर और सबोटूर, मेडिक और डेमोलिशनिस्ट, सिग्नलर और स्काउट सम्मिलित थे।
सोवियत संघ का महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध (22 जून 1941 - 9 मई 1945) सोवियत जनता के लिए द्वितीय विश्वयुद्ध के वर्षों में अपने देश के अस्तितव की रक्षा को लेकर सब से बड़ी घटना के रूप में दुनिया के इतिहास में जाना जाता है, जिसमें सोवियत संघ ने नाजी जर्मनी और उसके सहयोगियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। रूस में 9 मई को विजय दिवस मनाया जाता है, जो द्वितीय विश्व युद्ध में नाज़ी जर्मनी पर जीत का प्रतीक है।