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पहली भारतीय स्वदेशी एयर डिफेंस प्रणाली का परीक्षण जुलाई में होने वाला है
पहली भारतीय स्वदेशी एयर डिफेंस प्रणाली का परीक्षण जुलाई में होने वाला है
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क्रूज़ मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन और लॉइटिरिंग म्यूनिशन के आक्रमणों को रोकने के लिए बनाए जा रही स्वदेशी मिसाइल एयर डिफेंस प्रणाली “प्रोजेक्ट कुशा” का पहला... 13.05.2026, Sputnik भारत
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रक्षा सूत्रों से Sputnik हिन्दी को मिली जानकारी के अनुसार, जुलाई के अंत तक इस महत्वाकांक्षी प्रणाली का पहला कंट्रोल फ़ायरिंग परीक्षण किया जाएगा। इस इक्स्टेन्डड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (ERADS) में तीन स्तर की सुरक्षा प्रणालियां हैं।M3 मिसाइल से शत्रु के बड़े रणनैतिक लक्ष्य जैसे एयर रिफ्यूलर टैंकर, AWACS और लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों को लंबी दूरी से निशाना बनाया जा सकेगा। M1 के एक लांचर में 12 मिसाइलें और M2-M3 में 4-4 मिसाइलें होंगी जिनके एक साथ फ़ायर होने पर शत्रु के हवाई आक्रमण का नाकाम होना सुनिश्चित होगा। इन मिसाइलों की गति 5.5 मैक होगी।प्रणाली में अत्याधुनिक सीकर, नेविगेशन सिस्टम और रडार लगाए गए हैं। “प्रोजेक्ट कुशा” के अंतर्गत भारतीय वायुसेना के लिए 21700 करोड़ रुपए या 2.3 अरब डॉलर कीमत की 5 स्क्वाड्रन को 2023 में भारतीय रक्षा मंत्रालय ने स्वीकृति दी थी। इस प्रणाली का प्रयोग भारतीय नौसेना भी करेगी।रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की जा रही इस प्रणाली का उत्पादन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) करेंगे। इस प्रणाली के 2028 तक पूरी तरह तैयार होने की संभावना है।
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पहली भारतीय स्वदेशी एयर डिफेंस प्रणाली का परीक्षण जुलाई में होने वाला है
क्रूज़ मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन और लॉइटिरिंग म्यूनिशन के आक्रमणों को रोकने के लिए बनाए जा रही स्वदेशी मिसाइल एयर डिफेंस प्रणाली “प्रोजेक्ट कुशा” का पहला फ़ायरिंग परीक्षण अगले दो माह में हो सकता है।
रक्षा सूत्रों से Sputnik हिन्दी को मिली जानकारी के अनुसार, जुलाई के अंत तक इस महत्वाकांक्षी प्रणाली का पहला कंट्रोल फ़ायरिंग परीक्षण किया जाएगा। इस इक्स्टेन्डड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (ERADS) में तीन स्तर की सुरक्षा प्रणालियां हैं।
पहले स्तर की प्रणाली की मिसाइल M1 150 किमी की दूरी पर तेज़ गति से आ रही बैलेस्टिक मिसाइल, लड़ाकू विमान या लॉइटरिंग म्यूनिशन को नष्ट करेगी। दूसरे स्तर पर M2 मिसाइल 250 किमी की दूरी पर और तीसरे सबसे दूर के स्तर पर M3 मिसाइल 350 किमी की दूरी पर शत्रु के हवाई आक्रमण को रोकेगी।
M3 मिसाइल से शत्रु के बड़े रणनैतिक लक्ष्य जैसे एयर रिफ्यूलर टैंकर, AWACS और लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों को लंबी दूरी से निशाना बनाया जा सकेगा। M1 के एक लांचर में 12 मिसाइलें और M2-M3 में 4-4 मिसाइलें होंगी जिनके एक साथ फ़ायर होने पर शत्रु के हवाई आक्रमण का नाकाम होना सुनिश्चित होगा। इन
मिसाइलों की गति 5.5 मैक होगी।
सूत्रों ने Sputnik हिन्दी को बताया है कि यह प्रणाली आकार में छोटी होगी जिसे तेज़ गति से कहीं भी पहुंचाना आसान होगा और उसके लिए बहुत बड़े आकार के वाहन की आवश्यकता नहीं होगी। यह प्रणाली हवाई सुरक्षा के लिए बनाए गए भारतीय वायुसेना के नेटवर्क इंटीग्रेटेड एयर कमांड एण्ड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) और भारतीय सेना के हवाई सुरक्षा नेटवर्क आकाशतीर के साथ जुड़ जाएगी।
प्रणाली में अत्याधुनिक सीकर, नेविगेशन सिस्टम और रडार लगाए गए हैं। “प्रोजेक्ट कुशा” के अंतर्गत भारतीय वायुसेना के लिए 21700 करोड़ रुपए या 2.3 अरब डॉलर कीमत की 5 स्क्वाड्रन को 2023 में भारतीय रक्षा मंत्रालय ने स्वीकृति दी थी। इस प्रणाली का प्रयोग
भारतीय नौसेना भी करेगी।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की जा रही इस प्रणाली का उत्पादन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) करेंगे। इस प्रणाली के 2028 तक पूरी तरह तैयार होने की संभावना है।