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UN एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व के बिना अधूरा: जयशंकर

© REUTERS Adnan AbidiIndia's Foreign Minister Subrahmanyam Jaishankar addresses the BRICS foreign ministers' meeting at Bharat Mandapam in New Delhi, India May 14, 2026.
India's Foreign Minister Subrahmanyam Jaishankar addresses the BRICS foreign ministers' meeting at Bharat Mandapam in New Delhi, India May 14, 2026. - Sputnik भारत, 1920, 15.05.2026
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भारत में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दूसरे दिन, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक शासन और बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार पर आयोजित विशेष सत्र को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने रेखांकित किया कि आज की दुनिया अतीत की तुलना में कहीं अधिक परस्पर जुड़ी हुई, जटिल और बहुध्रुवीय हो चुकी है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, "ब्रिक्स देशों के तौर पर, हमारी यह साझी ज़िम्मेदारी है कि हम एक अधिक समावेशी, व्यापक प्रतिनिधित्व वाली और जवाबदेह वैश्विक शासन व्यवस्था को बढ़ावा दें। भारत ने हमेशा से एक सुधरी हुई बहुपक्षीय व्यवस्था का पुरज़ोर समर्थन किया है, एक ऐसी व्यवस्था जो आज की ज़मीनी हकीकतों को दर्शाती हो और उभरते बाज़ारों के साथ-साथ विकासशील देशों की आकांक्षाओं पर खरी उतरे।"

भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़ी संस्थाओं में सुधार आज भी मुख्य मुद्दा है। UN की सदस्यता लेने वाले देशों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, और इसकी ज़िम्मेदारियाँ बढ़ी हैं। फिर भी, मौजूदा ढांचे, खासकर सुरक्षा परिषद पुरानी तर्ज पर ही काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "जब तक संयुक्त राष्ट्र में बुनियादी बदलाव नहीं किए जाते और इसके स्थायी व अस्थायी दोनों ही स्वरूपों का विस्तार नहीं होता, तब तक इस वैश्विक संस्था का प्रभाव और इसकी साख दांव पर लगी रहेगी। आज के दौर में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को उनका वाजिब हक मिलना बेहद लाज़मी है।"

जयशंकर आगे कहते हैं कि बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को सुधारने और मजबूती देने की आवश्यकता है। गैर-बाज़ार आधारित नीतियां, कुछ ही क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला का सिमट जाना और बाज़ारों तक अनिश्चित पहुंच ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने नए संकट खड़े कर दिए हैं।

विदेश मंत्री जयशंकर ने जोर देकर कहा, "एक आदर्श बहुपक्षीय व्यवस्था का लोकतांत्रिक, सर्वसमावेशी और असरदार होना अनिवार्य है। बहुपक्षवाद को लेकर भारत का रुख हमेशा से ही आपसी संवाद, कूटनीतिक सहयोग और तमाम मतभेदों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की नीति पर अडिग रहा है।"

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BRICS से वैश्विक राजनीति में एक स्थिर भूमिका निभाने की उम्मीद: जयशंकर
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