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रूस ने भारतीय कंपनियों को व्लादिवोस्तोक टेक हब में बुलाया

© AP PhotoThe container terminal at the seaport in the Pacific city of Vladivostok, Russia, is seen on April 7, 2025.
The container terminal at the seaport in the Pacific city of Vladivostok, Russia, is seen on April 7, 2025.  - Sputnik भारत, 1920, 04.06.2026
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रूस के सुदूर पूर्व और आर्कटिक विकास मंत्री एलेक्सी चेकुनकोव ने SPIEF-2026 के इतर आयोजित भारत-रूस बिजनेस डायलॉग में कहा कि रूस का आर्कटिक देश के 55% क्षेत्र में फैला है। आर्कटिक क्षेत्र रूसी वन, प्राकृतिक संसाधनों, खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण हैं।
आगे उन्होंने जोड़ा कि यहां आबादी सिर्फ करीब 1 करोड़ है, भारतीय पैमाने पर यह किसी औसत शहर जितनी है। इसके बावजूद आर्कटिक क्षेत्र तेल, गैस, सोना, तांबा और हीरों सहित प्राकृतिक संसाधन का अहम केंद्र है।

उन्होंने रेखांकित किया कि भारतीय कंपनियां और कर्मचारी यहां पहले से ही सफल हो रहे हैं: ONGC का तेल और गैस क्षेत्र में बड़ा निवेश है, और कई भारतीय याकुत्स्क में हीरे तराशने के काम में सफलतापूर्वक कार्यरत हैं; यह इस बात का प्रमाण है कि "एक बेहद गर्म जलवायु वाले देश के नागरिक होने के बावजूद, भारतीय रूसी आर्कटिक क्षेत्र में भी बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं।"

चेकुनकोव ने कहा कि "राष्ट्रपति पुतिन के नेतृत्व में, रूसी सुदूर पूर्व और आर्कटिक का विकास पूरी 21वीं सदी के लिए एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है, जिसके लिए विशेष कर व्यवस्थाएं, मुफ़्त ज़मीन और बुनियादी ढाँचे का सहयोग पहले से ही उपलब्ध है।"
उनके मुताबिक अगले दो महीने में इन क्षेत्रों के सभी व्यवस्थाओं को मिलाकर एक "सुपर इकोनॉमिक ज़ोन" बनाया जाएगा जो पूरे रूस में निवेशकों के लिए सबसे आधुनिक और फायदेमंद व्यवस्था होगी।
चेकुनकोव ने कहा कि निवेशकों को बेहतर सहयोग मिलेगा और हर निवेशक का "अपने बच्चे की तरह" ध्यान तथा सबसे महत्वपूर्ण ग्राहक की तरह व्यवहार किया जाएगा।
उन्होंने रेखांकित किया कि समस्याओं का समाधान क्षेत्रीय स्तर पर, मंत्रालय स्तर पर, या ज़रूरत पड़ने पर सीधे उप-प्रधानमंत्री यूरी ट्रुत्नेव द्वारा किया जाता है। वर्तमान में 4,000 परियोजनाएँ, 15 ट्रिलियन रूबल के निवेश (6.6 ट्रिलियन पहले ही निवेश किया जा चुका है) की योजना है।
मंत्री के अनुसार, उत्तरी समुद्री मार्ग एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स गलियारा बनता जा रहा है। कार्गो आवागमन 10 लाख टन (2012) से बढ़कर पिछले साल 3.78 करोड़ टन हो गया; इस साल इसके 4 करोड़ टन और अगले पाँच वर्षों में 10 करोड़ टन तक पहुँचने की उम्मीद है। भारतीय लॉजिस्टिक्स और परिवहन कंपनियों की इसमें बढ़ती दिलचस्पी है; यह पारंपरिक मार्गों के मुकाबले एक कहीं अधिक छोटा और सुरक्षित विकल्प प्रदान करता है।
उन्होंने रेखांकित किया कि रूस 'अंतर्राष्ट्रीय विकास क्षेत्र' शुरू कर रहा है, जिनमें शेयरधारकों के रजिस्टर गुप्त रखे जाएँगे और उन्हें किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से पूर्ण सुरक्षा प्राप्त होगी। हाई-टेक विनिर्माण के लिए (भारत की सफल ऑफसेट नीति के समान) गारंटीशुदा मांग उपलब्ध कराई जाएगी।
चेकुनकोव ने कहा कि रूस व्लादिवोस्तोक (रूस्की द्वीप पर) में तीन बड़े तकनीकी केंद्र आईटी, एआई और टेलीकॉम, बायोटेक और बायोमेडिसिन के लिए बना रहा है। दुनिया के बेहतरीन विश्वविद्यालयों में काम करने वाले शीर्ष रूसी वैज्ञानिक, अभूतपूर्व परियोजनाओं का नेतृत्व करने के लिए वापस लौट रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की विनिर्माण विशेषज्ञता (उदाहरण के लिए, गुजरात में iPhone की असेंबली) और रूस की उन्नत तकनीक तथा वैज्ञानिक क्षमताओं का सामंजस्य पूरे एशियाई बाज़ार के लिए अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परियोजनाएँ तैयार कर सकता है।
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