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हॉर्मुज संकट के बीच आर्कटिक रूट की अहमियत बढ़ी, भारत को स्थिर तेल आपूर्ति की गारंटी: रोसनेफ्ट CEO

© Sputnik / Svetlana ShevchenkoShips at the port of Dudinka. Russia’s northernmost international harbor, deep inside the Arctic.
Ships at the port of Dudinka. Russia’s northernmost international harbor, deep inside the Arctic. - Sputnik भारत, 1920, 06.06.2026
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रूस की तेल कंपनी रोसनेफ्ट के CEO इगोर सेचिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के तहत आयोजित एनर्जी पैनल में वैश्विक तेल बाजार, भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग और आर्कटिक रूट की भूमिका पर अपनी राय रखी।
सेचिन ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के बीच आर्कटिक अब वैश्विक व्यापार के लिए एक भरोसेमंद वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स रूट के तौर पर और अहम हो गया है।
सेचिन ने कहा, "हम कुछ देशों की ओर से वैकल्पिक रास्ते बनाने की कोशिशों का स्वागत करते हैं, लेकिन वैश्विक व्यापार की जरूरतों को देखते हुए आर्कटिक की भूमिका खास है। ऐसे हालात में आर्कटिक का महत्व सिर्फ संसाधनों के बड़े आधार के रूप में रणनीतिक नहीं है, बल्कि सबसे बढ़कर एक भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स रूट के तौर पर भी है।"

भारत की बढ़ती मांग

भारत की ऊर्जा जरूरतों पर बोलते हुए सेचिन ने कहा, "आज भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक ऊर्जा खपत में वृद्धि के प्रमुख ड्राइवरों में से एक है।"
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बिजली और तेल, दोनों बाजारों में भारत की मांग तेजी से बढ़ेगी। सेचिन के मुताबिक अगले 10 वर्षों में वैश्विक तेल मांग में होने वाली बढ़ोतरी का लगभग आधा हिस्सा भारत से आ सकता है।

मध्य पूर्व संघर्ष का असर

सेचिन ने कहा कि मध्य पूर्व संघर्ष और नए जोखिम भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। हालांकि, यही स्थिति ऊर्जा सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक समाधान तलाशने की जरूरत को भी बढ़ाती है।

रूस की गारंटी

उन्होंने यह भी कहा कि रूस को वैश्विक सप्लाई चेन से अलग नहीं किया जा सकता। सेचिन के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक तेल बाजार की स्थिति के बीच भारत और चीन के साथ रूस की आर्थिक साझेदारी दोनों देशों को स्थिर तेल आपूर्ति की गारंटी देती है।
सेचिन ने कहा, "रूस को वैश्विक सप्लाई चेन से अलग नहीं किया जा सकता। वैश्विक तेल उद्योग में मौजूदा घटनाक्रमों के बीच भारत और चीन के साथ रूस की आर्थिक साझेदारी इन दोनों देशों को स्थिर आपूर्ति की गारंटी देती है।"

40 अरब डॉलर का फायदा

रोसनेफ्ट CEO ने कहा कि रूसी तेल आपूर्ति भारत और चीन जैसे साझेदारों को ठोस आर्थिक फायदा देती है। उनके मुताबिक, अप्रैल 2022 से भारत और चीन को रूसी तेल आपूर्ति से मिला संयुक्त आर्थिक लाभ 40 अरब डॉलर से ज्यादा रहा है।
SPIEF 2026 का आयोजन 3 से 6 जून तक सेंट पीटर्सबर्ग में हो रहा है। Sputnik इस फोरम का जनरल इंफॉर्मेशन पार्टनर है।
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