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नेपाल भारत के साथ मज़बूत रिश्ते चाहता है, रूस के साथ करीबी संबंधों की भी पुष्टि की

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Sputnik भारत से बातचीत में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि उनके भारत दौरे ने दोनों देशों के बीच संवाद को मज़बूत करने में मदद की है और नेपाल-भारत सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवाद को फिर से सक्रिय करना और नेपाल की नई सरकार की प्राथमिकताओं से भारत को अवगत कराना था।

नेपाल-भारत के बीच उच्च-स्तरीय संवाद की पुनः शुरुआत

विदेश मंत्री ने बताया कि नेपाल और भारत के बीच पिछला उच्च-स्तरीय संवाद लगभग दो वर्ष पहले हुआ था, इसलिए नियमित राजनीतिक संपर्क को फिर से शुरू करना आवश्यक था।
"मैं दो प्रमुख उद्देश्यों के साथ भारत आया था। पहला, दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवाद को पुनः शुरू करना और दूसरा, नेपाल-भारत संबंधों को लेकर नेपाल की नई सरकार की प्राथमिकताओं से भारत को अवगत कराना।"
उन्होंने भारतीय नेतृत्व के साथ हुई बातचीत को सकारात्मक, सार्थक और उत्साहजनक बताया।

आगे और उच्च-स्तरीय दौरों की उम्मीद

मंत्री ने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में नेपाल और भारत के बीच कई वरिष्ठ-स्तरीय दौरे होंगे।
"अब जब उच्च-स्तरीय संवाद की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है, तो मुझे उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच और भी वरिष्ठ स्तर की यात्राएँ होंगी।"
उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों की राजनीतिक सहभागिता को और मजबूत करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

विदेश नीति का केंद्र: सुशासन और आर्थिक विकास

विदेश मंत्री के अनुसार, नेपाल की विदेश नीति उसकी घरेलू प्राथमिकताओं से जुड़ी हुई है, विशेष रूप से बेहतर शासन और आर्थिक विकास से।
उन्होंने सरकार के दो प्रमुख लक्ष्य बताए:
🔸 सुशासन को मजबूत करना
🔸 आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाना
उन्होंने कहा कि नेपाल की विदेश नीति "विकास कूटनीति" पर आधारित है, जिसका उद्देश्य युवाओं के लिए देश के भीतर ही बेहतर अवसर पैदा करना है।
"हम विदेश नीति को आर्थिक विकास और नेपाली युवाओं के लिए देश में ही रोजगार, करियर और अवसर पैदा करने के दृष्टिकोण से देख रहे हैं।"

नेपाल-भारत संबंधों में चुनौतियों पर संवाद

विदेश मंत्री ने माना कि नेपाल और भारत के बीच सीमा प्रबंधन, सीमा विवाद, व्यापार और संपर्क (कनेक्टिविटी) जैसे कई मुद्दे हैं, जिन पर काम करने की आवश्यकता है।
हालाँकि उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के पास बातचीत के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति मौजूद है।
"ऐसी कोई चुनौती नहीं है जिसे हम मिलकर हल न कर सकें। हम मुद्दों पर चर्चा करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उनका समाधान निकालेंगे।"

नेपाल ने रूस के साथ अपने पुराने संबंधों को दोहराया

रूस के साथ संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल मॉस्को के साथ अपने लंबे और ऐतिहासिक संबंधों को महत्व देता है।
उन्होंने कहा कि भले ही आर्थिक संबंध सीमित रहे हों, लेकिन राजनीतिक और द्विपक्षीय रिश्ते हमेशा सकारात्मक रहे हैं।
मंत्री ने याद दिलाया कि 1960 और 1970 के दशक में छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के माध्यम से बड़ी संख्या में नेपाली छात्रों ने सोवियत संघ में शिक्षा प्राप्त की थी।
"रूस के साथ हमारे बहुत पुराने ऐतिहासिक संबंध हैं। हमारे राजनीतिक और द्विपक्षीय रिश्ते अच्छे हैं और लोगों के बीच संपर्क भी मजबूत बना हुआ है।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस के साथ संबंधों को बनाए रखना और उन्हें आगे बढ़ाना नेपाल सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

आगे की राह

यह यात्रा लंबे अंतराल के बाद नेपाल और भारत के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संवाद को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। साथ ही, नेपाल आर्थिक विकास, क्षेत्रीय सहयोग और रूस सहित अपने पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
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