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भारत ग्रेट निकोबार द्वीप को एक महत्वपूर्ण समुद्री केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है
भारत ग्रेट निकोबार द्वीप को एक महत्वपूर्ण समुद्री केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है
Sputnik भारत
भारत ग्रेट निकोबार द्वीप को दक्षिण हिंद महासागर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए विकसित कर रहा है। 09.06.2026, Sputnik भारत
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रक्षा मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने जानकारी दी है कि यह स्थान अदन की खाड़ी से मलक्का जलडमरूमध्य को जोड़ने वाले समुद्री मार्ग पर स्थित 6 डिग्री चैनल से केवल 40 किमी दूर है इसलिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।हाल के दिनों में यहां क्षेत्रीय शक्तियों के अतिरिक्त बाहरी शक्तियां भी अपनी गतिविधियां बढ़ा रही हैं। भारत ग्रेट निकोबार में एक अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एक नया हवाई अड्डा, नौसैनिक अड्डा, एक नागरिक क्षेत्र और एक ऊर्जा संयत्र बना रहा है। पोर्ट बनने से भारत की विदेशी पोर्ट पर निर्भरता कम होगी। यह पोर्ट दुनिया के सबसे व्यस्त संकरे समुद्री मार्ग मलक्का जलडमरूमध्य से केवल 40 नॉटिकल मील दूर है। एक नया एयरपोर्ट बनाकर भारत हिंद महासागर में रणनीतिक और व्यापारिक हितों को साधना चाहता है। नए एयरपोर्ट से भारत पूरे क्षेत्र पर आसानी से नज़र रख सकेगा और किसी भी अभियान को कम समय में पूरा कर पाएगा। साथ ही इस एयरपोर्ट से यहां पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का कहना है कि यह हवाई अड्डा प्रतिवर्ष 13.5 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा।
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भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारत का विकास, भारत सरकार, हिन्द महासागर, तकनीकी विकास , समावेशी विकास
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भारत ग्रेट निकोबार द्वीप को एक महत्वपूर्ण समुद्री केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है
भारत ग्रेट निकोबार द्वीप को दक्षिण हिंद महासागर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए विकसित कर रहा है।
रक्षा मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने जानकारी दी है कि यह स्थान अदन की खाड़ी से मलक्का जलडमरूमध्य को जोड़ने वाले समुद्री मार्ग पर स्थित 6 डिग्री चैनल से केवल 40 किमी दूर है इसलिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।
दुनिया के तेल व्यापार का दो-तिहाई हिस्सा और विश्व के कंटेनर यातायात का लगभग आधा हिस्सा इस संवेदनशील क्षेत्र से होकर निकलता है। भारत सरकार ग्रेट निकोबार को दक्षिण हिंद महासागर में समुद्री तस्करी और अवैध समुद्री दोहन पर नियंत्रण करने के केंद्र के रूप में भी विकसित करना चाहती है। अधिकारी ने बताया कि इन परियोजनाओं में पर्यावरण की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हाल के दिनों में यहां क्षेत्रीय शक्तियों के अतिरिक्त बाहरी शक्तियां भी अपनी गतिविधियां बढ़ा रही हैं। भारत ग्रेट निकोबार में एक अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एक नया हवाई अड्डा, नौसैनिक अड्डा, एक नागरिक क्षेत्र और एक ऊर्जा संयत्र बना रहा है।
पोर्ट बनने से भारत की विदेशी पोर्ट पर निर्भरता कम होगी। यह पोर्ट दुनिया के सबसे व्यस्त संकरे समुद्री मार्ग
मलक्का जलडमरूमध्य से केवल 40 नॉटिकल मील दूर है।
एक नया एयरपोर्ट बनाकर भारत हिंद महासागर में रणनीतिक और व्यापारिक हितों को साधना चाहता है। नए एयरपोर्ट से भारत पूरे क्षेत्र पर आसानी से नज़र रख सकेगा और किसी भी अभियान को कम समय में पूरा कर पाएगा। साथ ही इस एयरपोर्ट से यहां पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का कहना है कि यह हवाई अड्डा प्रतिवर्ष 13.5 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा।
ग्रेट निकोबार में पहले से ही भारतीय नौसेना एक रणनीतिक नौसैनिक हवाई अड्डा (आईएनएस बाज़) मौजूद है जहां से नौसेना अपने विमानों का संचालन करती है। लेकिन इसकी क्षमता सीमित है इसलिए नया और बड़ा एयरपोर्ट बनाया जा रहा है। आईएनएस बाज़ की ही तरह ही भारतीय नौसेना ने मार्च 2024 में अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप में भी एक अड्डा बनाया है जिससे अरब सागर के दक्षिण में अपनी उपस्थिति मजबूत की जा सके।