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दूर से प्रहार करने की क्षमता बढ़ाएगा भारत, नई स्वदेशी मिसाइल-बमों का निर्माण होगा

© AP Photo / Anupam NathAn Indian Air Force Sukhoi Su-30 fighter aircraft performs during 93rd Indian Airforce Day celebration in Guwahati, India, Sunday, Nov. 9, 2025. (AP Photo/Anupam Nath)
An Indian Air Force Sukhoi Su-30 fighter aircraft performs during 93rd Indian Airforce Day celebration in Guwahati, India, Sunday, Nov. 9, 2025. (AP Photo/Anupam Nath) - Sputnik भारत, 1920, 12.06.2026
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भारत लंबी दूरी से शत्रु पर प्रहार करने की अपनी क्षमता को बढ़ा रहा है। रक्षा उद्योग के सूत्रों से Sputnik को मिली जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाली क्रूज़ मिसाइल, विमान से गिराए जाने वाले बम और उन बमों की रेंज बढ़ाने वाली किट का निर्माण किया जाएगा।
रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सभी हथियार और गोलाबारूद देश में ही निर्मित करने पर जोर दिया जा रहा है। स्वदेशी रक्षा उद्योग अब लंबी दूरी से शत्रु के ठिकानों पर प्रहार करने के लिए कम लागत वाली क्रूज़ मिसाइल बनाएगा।
इन मिसाइलों की गति 0.8 मैक होगी और यह 1000 किमी से अधिक दूरी तक प्रहार करने में सक्षम होंगी। इनमें स्वतंत्र नेवीगेशन प्रणाली होगी, जिससे इन्हें शत्रु द्वारा जाम नहीं किया जा सकेगा। ये कई प्रकार के वॉरहेड ले जा सकेंगी और सुरक्षित दूरी से दुश्मन के ठिकानों पर अचूक वार करने में सक्षम होंगी।
विमान से गिराए जाने वाले बम फिलहाल आयात किए जाते हैं, जिन्हें अब स्वदेशी रक्षा उद्योग तैयार करेगा। 1000 किलोग्राम भार वाले इन बमों को भारतीय वायुसेना के सुखोई, मिग-29 सहित लगभग सभी लड़ाकू विमानों से गिराया जा सकेगा। इनका उपयोग शत्रु के प्रमुख ठिकानों, सैन्य वाहनों और सैनिक टुकड़ियों के खिलाफ किया जा सकेगा।
एक अन्य योजना के तहत इन बमों की मारक दूरी भी बढ़ाई जा रही है। बमों में एक स्वदेशी किट लगाकर उन्हें ग्लाइड बमों में बदला जाएगा, जिससे वे विमान से छोड़े जाने के बाद कुछ दूरी तक हवा में उड़ते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंच सकेंगे। इस किट के जरिए इनकी प्रभावशीलता और घातक क्षमता दोनों बढ़ जाएंगी।
पिछले वर्ष पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के बाद भारत लंबी दूरी से शत्रु पर प्रहार करने के महत्व को और बेहतर ढंग से समझ चुका है। आधुनिक युद्ध में जहां सुरक्षित दूरी से हमला करने की क्षमता महत्वपूर्ण है, वहीं हथियारों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी कारण भारत इन दोनों क्षमताओं को समानांतर रूप से विकसित कर रहा है।
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