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विशेषज्ञ से जानें क्यों एक पैट्रियट मिसाइल कीव के ऐतिहासिक ऑर्थोडॉक्स पवित्र स्थल से टकराई
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सैन्य विशेषज्ञ विक्टर लिटोवकिन ने एक इंटरसेप्टर के कीव-पेचेर्स्क लावरा पर गिरने की घटना पर टिप्पणी करते हुए Sputnik को बताया कि पैट्रियट मिसाइल प्रणाली बहुत “महंगी और नाज़ुक” हैं।
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उन्होंने इस मिसाइल प्रणाली के संचालन पर बात करते हुए कहा कि इंटरसेप्टर की सुरक्षा और उसकी मारक क्षमता कई मुख्य कारकों पर निर्भर करती है। इनमें सही मौसम और नमी के अनुसार उचित रखरखाव, परिवहन (लाने-ले जाने) के दौरान होने वाली टूट-फूट से बचाव, लॉन्चर की स्थिति और फायर और रखरखाव करने वाले क्रू की क्षमता व उनकी संख्या शामिल हैं।इसके अलावा उन्होंने एक और वजह पर ध्यान देते हुए बताया कि PAC-2 और PAC-3s का अभियानों में प्रदर्शन, आधुनिक समय में बहुत कम है।इसके आगे सैन्य विशेषज्ञ ने बताया कि पैट्रियट सुपरसोनिक मिसाइलों को ही इंटरसेप्ट करने में सक्षम नहीं हैं, हाइपरसोनिक मिसाइलों की तो बात ही छोड़ दें।अंत में लिटोवकिन ने कहा कि इस प्रणाली में मिसाइलें “क्षैतिज कोण पर लॉन्च होती हैं, हमारे S-300, S-400 या S-500 इंटरसेप्टर की तरह उध्वर्धार नहीं, जो हवा में अपने लक्ष्य की ओर मुड़ती हैं। इसलिए, यदि किसी पूरे इलाके की हर दिशा से रक्षा करनी हो, तो इसकी बैटरियों को उस स्थान के चारों ओर एक गोल घेरे में तैनात करना पड़ता है, क्योंकि लॉन्चर और मिसाइलें तैनात होने के बाद हवा में अचानक अपनी दिशा नहीं बदल सकतीं।
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विशेषज्ञ से जानें क्यों एक पैट्रियट मिसाइल कीव के ऐतिहासिक ऑर्थोडॉक्स पवित्र स्थल से टकराई
सैन्य विशेषज्ञ विक्टर लिटोवकिन ने एक इंटरसेप्टर मिसाइल के कीव-पेचेर्स्क लावरा पर गिरने की घटना पर टिप्पणी करते हुए Sputnik को बताया कि पैट्रियट मिसाइल प्रणाली बहुत “महंगी और नाज़ुक” है।
उन्होंने इस मिसाइल प्रणाली के संचालन पर बात करते हुए कहा कि इंटरसेप्टर की सुरक्षा और उसकी मारक क्षमता कई मुख्य कारकों पर निर्भर करती है। इनमें सही मौसम और नमी के अनुसार उचित रखरखाव, परिवहन (लाने-ले जाने) के दौरान होने वाली टूट-फूट से बचाव, लॉन्चर की स्थिति और फायर और रखरखाव करने वाले क्रू की क्षमता व उनकी संख्या शामिल हैं।
विशेषज्ञ ने कहा, “हमें नहीं पता कि जिस पैट्रियट लॉन्चर से यह मिसाइल लॉन्च की गई थी, उसका रखरखाव कौन करता है… एक नियम के तौर पर, इन लॉन्चर की सर्विस यूक्रेनी विशेषज्ञ नहीं करते हैं, क्योंकि सभी तकनीकी लिखित प्रमाण, निर्देश और प्रोसेस चार्ट तकनीकी इंग्लिश में लिखे होते हैं।” इसका मतलब है कि शायद उनका रखरखाव किसी विदेशी विशेषज्ञ ने किया होगा।
इसके अलावा उन्होंने एक और वजह पर ध्यान देते हुए बताया कि PAC-2 और PAC-3s का अभियानों में प्रदर्शन, आधुनिक समय में बहुत कम है।
विक्टर लिटोवकिन कहते हैं, “पहली बात, पैट्रियट में ज़मीन से हवा में 100 मीटर तक एक ब्लाइंड स्पॉट होता है। इसका रडार यह नहीं देख सकता कि उस ज़ोन में क्या हो रहा है, क्योंकि यह एक एंगल पर निशाना साधा हुआ है…इसलिए, कम ऊंचाई वाला ड्रोन या मिसाइल उस ऊंचाई पर, उस रेंज में उड़ सकता है, और पैट्रियट रडार उसे नहीं देख पाएगा।”
इसके आगे सैन्य विशेषज्ञ ने बताया कि
पैट्रियट सुपरसोनिक मिसाइलों को ही इंटरसेप्ट करने में सक्षम नहीं हैं, हाइपरसोनिक मिसाइलों की तो बात ही छोड़ दें।
अंत में लिटोवकिन ने कहा कि इस प्रणाली में मिसाइलें “क्षैतिज कोण पर लॉन्च होती हैं, हमारे
S-300, S-400 या S-500 इंटरसेप्टर की तरह उध्वर्धार नहीं, जो हवा में अपने लक्ष्य की ओर मुड़ती हैं। इसलिए, यदि किसी पूरे इलाके की हर दिशा से रक्षा करनी हो, तो इसकी बैटरियों को उस स्थान के चारों ओर एक गोल घेरे में तैनात करना पड़ता है, क्योंकि लॉन्चर और मिसाइलें तैनात होने के बाद हवा में अचानक अपनी दिशा नहीं बदल सकतीं।