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भारत की समुद्री ताकत बढ़ी, नौसेना में शामिल हुए तीन स्वदेशी युद्धपोत

© Photo : Indian NavyPM attends Tri-Commissioning Ceremony of Dunagiri, Sanshodhak & Agray at Syama Prasad Mookerjee Port, Kolkata, in West Bengal on June 21, 2026.
PM attends Tri-Commissioning Ceremony of Dunagiri, Sanshodhak & Agray at Syama Prasad Mookerjee Port, Kolkata, in West Bengal on June 21, 2026. - Sputnik भारत, 1920, 21.06.2026
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रविवार को भारतीय नौसेना में तीन नए स्वदेशी युद्धपोत शामिल किए गए। इन तीनों का ही निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने किया है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि जिस देश का समुद्री सामर्थ्य जितना अधिक होगा, उसका रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव उतना ही ज्यादा होगा।
नौसेना में शामिल किए युद्धपोतों में स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरि भी है, जो नीलगिरि श्रेणी का पांचवां युद्धपोत है। दूनागिरि लगभग 6500 टन भारी और 149 मीटर लंबा पोत है, जिसमें 226 नौसैनिकों को तैनात किया जा सकता है।
इसका मुख्य अस्त्र इसमें लगी 8 ब्रह्मोस मिसाइलें हैं, जिनसे शत्रु के पोतों या ज़मीनी ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। शत्रु के हवाई आक्रमण को रोकने के लिए इसमें 100 किमी तक मार करने वाली 32 बराक मिसाइलें लगी हैं।
साथ ही सबमरीन आक्रमण से बचाव के लिए इसमें टारपीडो और रॉकेट लगे हैं। इसमें अत्याधुनिक रडार, सोनार और इलेक्ट्रॉनिक वारफ़ेयर सूट लगे हैं। इस श्रेणी के कुल सात फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं, जिनमें अंतिम दो के भी इसी वर्ष नौसेना में शामिल होने की संभावना है।
अग्रय कम गहरे समुद्र में शत्रु की सबमरीन को ढूंढ़कर उसे नष्ट करने वाला Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft (ASW-SWC) अरनाला श्रेणी का पोत है। यह पोत मात्र 900 टन भार का और 77.6 मीटर लंबा है, ताकि यह तेज़ गति से तट के आसपास चौकसी कर सके।
सबमरीन का शिकार करने के लिए इसमें टारपीडो, सबमरीन रोधी रॉकेट लगे हैं और यह समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है। इसमें नौसैनिक तोप और भारी मशीनगन भी लगाई गई है। सबमरीन की तलाश करने के लिए सोनार लगाए गए हैं।
संशोधक 3300 टन भारी और 110 मीटर लंबा संध्यायक श्रेणी का बड़ा सर्वेक्षक पोत है। यह इस श्रेणी का चौथा और अंतिम पोत है।
हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी को मिलाकर भारत का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन लगभग 23 लाख वर्ग किलोमीटर है। सर्वेक्षण पोत का दायित्व इस विशाल समुद्री क्षेत्र में हाइड्रोग्राफ़ी और ओशियनोग्राफ़ी का जटिल और आवश्यक कार्य है।
ये पोत समुद्र के अंदर की संपदा का पता लगाते हैं, समुद्र के तल और जल प्रवाह के आंकड़े एकत्र करते हैं, ताकि नौवहन सुरक्षित हो सके।
An Indian Air Force Sukhoi Su-30 fighter aircraft performs during 93rd Indian Airforce Day celebration in Guwahati, India, Sunday, Nov. 9, 2025. (AP Photo/Anupam Nath) - Sputnik भारत, 1920, 12.06.2026
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