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रूसी वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी, न्यूरल नेटवर्क अब जमीन की हलचल से लगाएगा भूकंप का अनुमान
रूसी वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी, न्यूरल नेटवर्क अब जमीन की हलचल से लगाएगा भूकंप का अनुमान
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रूस के वैज्ञानिकों ने KNR के साझेदारों के साथ मिलकर भूकंप का अनुमान लगाने के लिए नया एल्गोरिदम DVFI प्रपोज़ किया है।
2026-07-01T11:55+0530
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"सोलर-टेरेस्ट्रियल रिलेशन्स एंड फिजिक्स ऑफ़ अर्थक्वेक प्रीकर्सर्स" कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए नतीजों के अनुसार यह कंप्यूटर प्रोग्राम धरती की सतह की सही बनावट की पहचान कर सकेगा जिसके लिए बहुत ज़्यादा कंप्यूटिंग संसाधनों की ज़रूरत नहीं होगी।दुनिया भर में भूकंप के पूर्वसंकेत का पता लगाने के जाने-माने तरीकों में से एक धरती की सतह की आवाज़ सुनने पर आधारित है और बढ़ी हुई टेक्टोनिक गतिविधि के साथ खास आवाज़ें आती हैं जिन्हें जियोअकॉस्टिक एमिशन कहा जाता है।रूसी दक्षिण-पूर्वी संघीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कहा कि जमीन के नीचे की चट्टानों में बहुत ज़्यादा टेक्टोनिक तनाव होने के कारण यह आवाज़ें आती हैं।विश्वविद्यालय ने अवलोकन के परिणामों को प्रोसेस करने के लिए ऐसे प्रोग्राम बनाए हैं, जो 'फ़िज़िक्स-इन्फॉर्म्ड न्यूरल नेटवर्क्स' की आधुनिक विधियों के साथ-साथ न्यूरल नेटवर्क के नए आर्किटेक्चर 'कोलमोगोरोव-अर्नोल्ड नेटवर्क्स' का उपयोग करते हैं।वैज्ञानिकों के अनुसार, नई तकनीक ध्वनिक संकेतों के विश्लेषण में लगने वाली कम्प्यूटिंग लागत को कम करती है। साथ ही यह रिज़ॉल्यूशन में सुधार करती है, जिससे बड़े भू-क्षेत्र का अध्ययन संभव होता है और भूवैज्ञानिक संरचनाओं के अधिक सटीक 2D और 3D मानचित्र तैयार किए जा सकते हैं।यह शोध विज्ञान एवं उच्च शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से किया गया।
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रूसी वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी, न्यूरल नेटवर्क अब जमीन की हलचल से लगाएगा भूकंप का अनुमान
रूस के वैज्ञानिकों ने चीन के साथ मिलकर भूकंप का अनुमान लगाने के लिए एक नया एल्गोरिदम खोज लिया है।
"सोलर-टेरेस्ट्रियल रिलेशन्स एंड फिजिक्स ऑफ़ अर्थक्वेक प्रीकर्सर्स" कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए नतीजों के अनुसार यह कंप्यूटर प्रोग्राम धरती की सतह की सही बनावट की पहचान कर सकेगा जिसके लिए बहुत ज़्यादा कंप्यूटिंग संसाधनों की ज़रूरत नहीं होगी।
दुनिया भर में
भूकंप के पूर्वसंकेत का पता लगाने के जाने-माने तरीकों में से एक धरती की सतह की आवाज़ सुनने पर आधारित है और बढ़ी हुई टेक्टोनिक गतिविधि के साथ खास आवाज़ें आती हैं जिन्हें जियोअकॉस्टिक एमिशन कहा जाता है।
रूसी दक्षिण-पूर्वी संघीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कहा कि जमीन के नीचे की चट्टानों में बहुत ज़्यादा
टेक्टोनिक तनाव होने के कारण यह आवाज़ें आती हैं।
नए प्रोग्राम के निर्माताओं में से एक, सर्गेई शेवकुन ने कहा, "आमतौर पर, अलग-अलग लोगों की तकनीकों द्वारा की जाने वाली आवाज़ें भूकंप संबंधी आवाजों को जांचने में रुकावट डालती हैं। लेकिन हम इन्हीं स्रोतों का उपयोग पृथ्वी की परत के एक अतिरिक्त भूकंपीय खंड का मानचित्र तैयार करने और उसकी संरचना को समझने के लिए करने का प्रस्ताव रखते हैं। इसे 'भूकंप के पूर्वसंकेत' में से एक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।"
विश्वविद्यालय ने अवलोकन के परिणामों को प्रोसेस करने के लिए ऐसे प्रोग्राम बनाए हैं, जो 'फ़िज़िक्स-इन्फॉर्म्ड न्यूरल नेटवर्क्स' की आधुनिक विधियों के साथ-साथ
न्यूरल नेटवर्क के नए आर्किटेक्चर 'कोलमोगोरोव-अर्नोल्ड नेटवर्क्स' का उपयोग करते हैं।
शेवकुन ने कहा, "सटीकता बढ़ाने के लिए आमतौर पर अवलोकनों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है। नई विधि इस कमी को दूर करती है और मौजूदा अवलोकनों को और मजबूत बनाती है। इससे पृथ्वी के भीतर होने वाली प्रक्रियाओं के भौतिक नियमों को समझने के लिए अतिरिक्त जानकारी मिलती है।"
वैज्ञानिकों के अनुसार, नई तकनीक ध्वनिक संकेतों के विश्लेषण में लगने वाली कम्प्यूटिंग लागत को कम करती है। साथ ही यह रिज़ॉल्यूशन में सुधार करती है, जिससे बड़े भू-क्षेत्र का अध्ययन संभव होता है और भूवैज्ञानिक संरचनाओं के अधिक सटीक 2D और 3D मानचित्र तैयार किए जा सकते हैं।
वैज्ञानिक ने कहा, "फिलहाल यह शोध सैद्धांतिक स्तर पर है। हमने संख्यात्मक प्रयोग किए हैं जिनके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। भविष्य में इस तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, इसका इस्तेमाल भूकंपीय अन्वेषण में किया जा सकता है, जिसका उपयोग तेल, गैस, कोयला और अन्य खनिज संसाधनों की खोज तथा बड़े निर्माण कार्यों या ड्रिलिंग से पहले मिट्टी की मजबूती का आकलन करने के लिए किया जाता है।"
यह शोध विज्ञान एवं उच्च शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से किया गया।