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पश्चिम बाल्टिक सागर तक रूस की पहुंच को अवरुद्ध करना चाहता है: रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी

© Sputnik / Konstantin Mihalchevskiy / मीडियाबैंक पर जाएंThe Russian Navy Caesar Kunikov landing ship is seen during an amphibious assault exercise along the coast held by army corps and naval infantry units of the Russian Black Sea Fleet at the Opuk training ground near Kerch, Crimea, Russia.
The Russian Navy Caesar Kunikov landing ship is seen during an amphibious assault exercise along the coast held by army corps and naval infantry units of the Russian Black Sea Fleet at the Opuk training ground near Kerch, Crimea, Russia. - Sputnik भारत, 1920, 11.07.2026
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रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी और रूसी समुद्री बोर्ड के अध्यक्ष निकोलाई पात्रुशेव ने कहा कि पश्चिमी देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों तक रूस की पहुंच को अवरुद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "हमें थोड़ा व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा, क्योंकि ये वे नव-नाज़ी हैं जो पश्चिम का नेतृत्व करते हुए रूस के ख़िलाफ़ युद्ध लड़ रहे हैं। उनका उद्देश्य हमें नष्ट करना है। वे इस मुद्दे को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखते हैं, क्योंकि वे हमें अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से अलग करना चाहते हैं।"

पात्रुशेव के मुताबिक, नव-नाज़ी ताकतें रूस के लिए बाल्टिक सागर को बंद करने और काला सागर तक पहुंच को रोकने का प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने कहा, "इसके अलावा, वे आर्कटिक क्षेत्र, विशेष रूप से बारेंट्स सागर में, जहां हमारे सैन्य अड्डे स्थित हैं, विभिन्न कदम उठाने की योजना बना रहे हैं। हम इन सभी योजनाओं के बारे में जानते है और प्रभावी ढंग से उनका मुकाबला कर रहे हैं।"

पात्रुशेव ने जोर देकर कहा कि रूस इन खतरों से अवगत है और उनका सामना कर रहा है। उन्होंने अन्य देशों के साथ सहयोग करने में रूस की अनिच्छा के दावों को भी झूठ करार दिया।
इस संदर्भ में पात्रुशेव ने 2002 में विभिन्न देशों की ख़ुफ़िया सेवाओं के बीच आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, समुद्री डकैती और साइबर सुरक्षा जैसी प्रमुख चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों के प्रस्ताव की याद दिलाई।
उन्होंने कहा, "हमने इन खतरों को ख़त्म करने के तरीकों पर चर्चा की और उनके लिए कई विकल्प भी सुझाए थे।"
पात्रुशेव के मुताबिक़, रूस ने इस विषय पर बैठकें बारी-बारी से रूस और पश्चिमी देशों में आयोजित करने का प्रस्ताव दिया।
उन्होंने कहा, "हालांकि, पश्चिमी देशों में से किसी ने भी इन बैठकों की मेजबानी करने की इच्छा नहीं जताई।"
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