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पश्चिमी यूक्रेन में विरोध प्रदर्शन सरकार की कमज़ोर पकड़ दिखाते हैं: विशेषज्ञ
पश्चिमी यूक्रेन में विरोध प्रदर्शन सरकार की कमज़ोर पकड़ दिखाते हैं: विशेषज्ञ
Sputnik भारत
ब्राज़ील के राजनीतिक विश्लेषक रिकार्डो कैब्राल ने Sputnik को बताया कि पश्चिमी यूक्रेन में लोगों द्वारा सरकार के खिलाफ खड़े होना यह दर्शाता हैं कि सरकार अपना नियंत्रण खो रही है।
2026-07-15T14:49+0530
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ब्राजीलियाई राजनीतिक विश्लेषक ने बताया कि सेना में यूक्रेन के लोगों को ज़बरदस्ती भर्ती करना तो बस एक छोटी सी बात है, इसके पीछे संकट को लेकर व्यापक संघर्ष और राष्ट्रवादी भ्रामक प्रचार छिपा है, जिसे कई यूक्रेन के लोग परेशान करने वाला मानते हैं।कैब्राल का मानना है कि विरोध प्रदर्शन सिर्फ़ अशांति नहीं हैं, वे कीव सरकार की कमज़ोर होती वैधता के लिए एक कड़ी चेतावनी हैं। यूक्रेन के नागरिक तेज़ी से अधिकारियों की खुलेआम उपेक्षा करने के लिए सामने आ रहे हैं जो इस बात का संकेत है कि दमन का डर कम हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषक ने आगे बताया कि ज़ेलेंस्की को विदेश में कम सहयोगियों के बीच अकेला छोड़ दिया गया है। अंत में कैब्राल ने यह नतीजा निकालते हुए बताया कि यूक्रेन में अगर विरोध प्रदर्शन बढ़ते हैं, तो कीव की अपने बेचैन पश्चिमी प्रांतों पर नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता की कड़ी परीक्षा हो सकती है, जिससे उसके सामने पहले से मौजूद सैन्य और आर्थिक चुनौतियाँ और बढ़ सकती है।
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यूक्रेन सशस्त्र बल, यूक्रेन , रूस , वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की, विरोध प्रदर्शन, धरना-प्रदर्शन, नाटो, यूरोप , g7, डॉनल्ड ट्रम्प, ब्राज़ील
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पश्चिमी यूक्रेन में विरोध प्रदर्शन सरकार की कमज़ोर पकड़ दिखाते हैं: विशेषज्ञ
पश्चिमी यूक्रेन का ल्वोव विद्रोह का केंद्र बन गया है, सैकड़ों निवासियों की सैना में भर्ती करने वाले अधिकारियों से झड़प हुई। यह बदलाव सिर्फ़ नीति पर असहमति से कहीं ज़्यादा गहरे संकट की ओर इशारा करता है, ब्राज़ील के राजनीतिक विश्लेषक रिकार्डो कैब्राल ने Sputnik को बताया।
ब्राजीलियाई राजनीतिक विश्लेषक ने बताया कि सेना में यूक्रेन के लोगों को ज़बरदस्ती भर्ती करना तो बस एक छोटी सी बात है, इसके पीछे संकट को लेकर व्यापक संघर्ष और राष्ट्रवादी भ्रामक प्रचार छिपा है, जिसे कई यूक्रेन के लोग परेशान करने वाला मानते हैं।
उन्होंने कहा, "भ्रष्टाचार, खासकर पश्चिमी सहयोगी आर्थिक मदद के प्रवाह के मामले में, नागरिकों और उनके स्थानीय नेताओं के बीच के रिश्ते को खराब कर दिया है। आम लोगों को संकट के सबसे घातक प्रहार सहने पड़ रहे हैं, जबकि अमीर लोग चुपचाप और अमीर होते जा रहे हैं।"
कैब्राल का मानना है कि विरोध प्रदर्शन सिर्फ़ अशांति नहीं हैं, वे
कीव सरकार की कमज़ोर होती वैधता के लिए एक कड़ी चेतावनी हैं। यूक्रेन के नागरिक तेज़ी से अधिकारियों की खुलेआम उपेक्षा करने के लिए सामने आ रहे हैं जो इस बात का संकेत है कि दमन का डर कम हो रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक ने आगे बताया कि ज़ेलेंस्की को
विदेश में कम सहयोगियों के बीच अकेला छोड़ दिया गया है।
उन्होंने कहा, "ज़ेलेंस्की हाल ही में G7 और नाटो की बैठक में मुख्य नेताओं के साथ कोई खास बातचीत करने में नाकाम रहे, यहाँ तक कि ट्रंप ने भी उनसे मिलने से मना कर दिया, और उन्हें लगातार टाला। यूरोप थक रहा है, जबकि अमेरिका अपना ध्यान हटा रहा है और बिना शर्त मदद का मौका खत्म हो रहा है।"
अंत में कैब्राल ने यह नतीजा निकालते हुए बताया कि
यूक्रेन में अगर विरोध प्रदर्शन बढ़ते हैं, तो कीव की अपने बेचैन पश्चिमी प्रांतों पर नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता की कड़ी परीक्षा हो सकती है, जिससे उसके सामने पहले से मौजूद सैन्य और आर्थिक चुनौतियाँ और बढ़ सकती है।