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रूस, भारत और चीन के साथ मिलकर बाघ संरक्षण को मजबूत कर रहा है
रूस, भारत और चीन के साथ मिलकर बाघ संरक्षण को मजबूत कर रहा है
Sputnik भारत
रूस, बाघ संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चीन, भारत, नेपाल और बांग्लादेश जैसे बाघों के आवास वाले देशों के साथ सहयोग कर रहा है।
2026-07-21T18:49+0530
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"अमूर बाघ" केंद्र के जनरल डायरेक्टर सर्गे अरामिलेव ने Sputnik को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि बाघ संरक्षण में दूसरे देश रूस के अनुभव और तरीकों को काम में ला रहे हैं।उन्होंने आगे याद करते हुए बताया कि 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में इस प्रजाति के संरक्षण पर एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे, इसके अलावा 2022 में व्लादिवोस्तोक में नए बदलावों के साथ एक और घोषणा पत्र पर भी साइन किए गए। अरामिलेव ने यह भी बताया कि इन दस्तावेजों में बाघ आवास क्षेत्र वाले 14 देशों के बीच सहयोग के लिए एक तरीका बताया गया था। अरामिलेव ने आगे जोड़ते हुए बताया कि दूसरे देश भी रूसी अनुभव और तरीकों के साथ अच्छे से काम कर रहे हैं, इन परियोजनाओं के तहत वैज्ञानिक और विशेषज्ञों के बीच नियमित साल में एक बार बैठक होती है जहां सभी देश किसी खास क्षेत्र में अपनी कामयाबी को सब से साझा करते हैं, जिन्हें बाद में दूसरे देश इस्तेमाल करते हैं।
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रूस , रूस का विकास , मास्को , भारत का विकास, भारत सरकार, भारत, दिल्ली , चीन, बीजिंग, द्विपक्षीय रिश्ते, बाघ
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रूस, भारत और चीन के साथ मिलकर बाघ संरक्षण को मजबूत कर रहा है
रूस, बाघ संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भारत, चीन, नेपाल और बांग्लादेश जैसे बाघों के आवास वाले देशों के साथ सहयोग कर रहा है।
"अमूर बाघ" केंद्र के जनरल डायरेक्टर सर्गे अरामिलेव ने Sputnik को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि बाघ संरक्षण में दूसरे देश रूस के अनुभव और तरीकों को काम में ला रहे हैं।
उन्होंने आगे याद करते हुए बताया कि 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में इस प्रजाति के संरक्षण पर एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे, इसके अलावा 2022 में व्लादिवोस्तोक में नए बदलावों के साथ एक और
घोषणा पत्र पर भी साइन किए गए।
अरामिलेव ने यह भी बताया कि इन दस्तावेजों में
बाघ आवास क्षेत्र वाले 14 देशों के बीच सहयोग के लिए एक तरीका बताया गया था।
अरामिलेव ने कहा, "वैज्ञानिक डेटा और जानकारी के आदान-प्रदान के लिए एक साझा डेटा आदान-प्रदान केंद्र मौजूद हैं, इसके अलावा इस सहयोग के अंदर, अलग-अलग द्विपक्षीय परियोजनाएं हैं। उदाहरण के लिए, रूसी-भारतीय परियोजना, जहाँ हम बाघों की आबादी पर शोध, उन पर नजर रखने और उनकी गिनती के लिए अत्याधुनिक तकनीक साझा करते हैं।"
अरामिलेव ने आगे जोड़ते हुए बताया कि दूसरे देश भी रूसी अनुभव और तरीकों के साथ अच्छे से काम कर रहे हैं, इन परियोजनाओं के तहत
वैज्ञानिक और विशेषज्ञों के बीच नियमित साल में एक बार बैठक होती है जहां सभी देश किसी खास क्षेत्र में अपनी कामयाबी को सब से साझा करते हैं, जिन्हें बाद में दूसरे देश इस्तेमाल करते हैं।