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रूसी वैज्ञानिकों की टीम ने लंग्स कैंसर के उपचार का नया तरीका खोजा
रूसी वैज्ञानिकों की टीम ने लंग्स कैंसर के उपचार का नया तरीका खोजा
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RUDN विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च टीम के हिस्से के तौर पर फेफड़ों के कैंसर के एक ऐसे प्रकार से निपटने का तरीका सुझाया है
2026-07-27T19:10+0530
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जारी बयान के अनुसार, शोधकर्ताओं ने रेडिएशन थेरेपी के साथ PCSK9 इनहिबिटर (अवरोधक) दवाओं को शामिल करने का सुझाव दिया है। आमतौर पर इन दवाओं का इस्तेमाल कोलेस्ट्रॉल कम करने और डायबिटीज के इलाज में किया जाता है।दरअसल लंग एडेनोकार्सिनोमा मैलिग्नेंट लंग ट्यूमर (रूस और दुनिया भर में सबसे आम कैंसर) से सबसे अधिक लोग प्रभावित होते हैं। इस रोग से पीड़ित कुछ मरीज़ों में जीन म्यूटेशन होते हैं, जिसके कारण मानक उपचार अप्रभावी हो जाते हैं।पीपुल्स फ्रेंडशिप यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ़ मॉलिक्यूलर एंड सेल्युलर मेडिसिन के वैज्ञानिकों की एक टीम ने रूस और चीन के अपने सहयोगियों के साथ मिलकर तेजी से फैलने वाले फेफड़ों के कैंसर की कोशिकाओं के खास इन-विट्रो कल्चर तैयार किए। कैंसर कोशिकाओं को CRISPR/Cas9 "मॉलिक्यूलर सिज़र्स" का इस्तेमाल करके बदला गया।प्रयोग से यह साबित हुआ कि हैड्रॉन थेरेपी और PCSK9 अवरोधकों का मेल, सामान्य इलाज की तुलना में कैंसर सेल्स को ज़्यादा असरदार तरीके से खत्म करता है।
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रूसी वैज्ञानिकों की टीम ने लंग्स कैंसर के उपचार का नया तरीका खोजा
रूस की पीपुल्स फ्रेंडशिप यूनिवर्सिटी की प्रेस सर्विस के मुताबिक, यहां के वैज्ञानिकों ने एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च टीम के साथ मिलकर फेफड़ों के कैंसर के एक ऐसे प्रकार का इलाज ढूंढा है, जिसे सर्जरी या कीमोथेरेपी जैसी सामान्य चिकित्सा से ठीक करना लगभग असंभव था।
जारी बयान के अनुसार, शोधकर्ताओं ने रेडिएशन थेरेपी के साथ PCSK9 इनहिबिटर (अवरोधक) दवाओं को शामिल करने का सुझाव दिया है। आमतौर पर इन दवाओं का इस्तेमाल कोलेस्ट्रॉल कम करने और डायबिटीज के इलाज में किया जाता है।
दरअसल लंग एडेनोकार्सिनोमा मैलिग्नेंट लंग ट्यूमर (रूस और दुनिया भर में सबसे आम कैंसर) से सबसे अधिक लोग प्रभावित होते हैं। इस रोग से पीड़ित कुछ मरीज़ों में जीन म्यूटेशन होते हैं, जिसके कारण मानक उपचार अप्रभावी हो जाते हैं।
पीपुल्स फ्रेंडशिप यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ़ मॉलिक्यूलर एंड सेल्युलर मेडिसिन के वैज्ञानिकों की एक टीम ने रूस और चीन के अपने सहयोगियों के साथ मिलकर तेजी से फैलने वाले फेफड़ों के कैंसर की कोशिकाओं के खास इन-विट्रो कल्चर तैयार किए। कैंसर कोशिकाओं को CRISPR/Cas9 "मॉलिक्यूलर सिज़र्स" का इस्तेमाल करके बदला गया।
इसके बाद वैज्ञानिकों ने क्लोन की गई "म्यूटेंट" कोशिकाओं को रेडिएशन के संपर्क में रखा और साथ ही ऐसी दवाएं दीं जो PCSK9 एंजाइम को रोकती हैं। यह एंजाइम लिवर, आंतों, अग्न्याशय और फैट टिश्यू से निकलता है और जीवित जीवों में कुछ मेटाबोलिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
प्रयोग से यह साबित हुआ कि हैड्रॉन थेरेपी और PCSK9 अवरोधकों का मेल, सामान्य इलाज की तुलना में
कैंसर सेल्स को ज़्यादा असरदार तरीके से खत्म करता है।
"हैड्रॉन थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी के विकास में एक नया कदम है। यह मरीज़ के स्वस्थ टिशू और अंगों को प्रभावित किए बिना, बीमार सेल्स पर चार्ज्ड न्यूक्लियर पार्टिकल्स (जैसे प्रोटॉन या न्यूट्रॉन) की एक शक्तिशाली बीम से टारगेटेड रेडिएशन करने की अनुमति देता है। यह कारगर और अत्यंत सटीक है," अध्ययन के लेखकों में से एक और विश्वविद्यालय के सूक्ष्म जीव विज्ञान संस्थान की प्रायोगिक ऊतक-संरचना प्रयोगशाला में शोधकर्ता अल्योना गैंत्सोवा ने कहा।