बड़े रूसी बैंक के प्रमुख ने डॉलर के 'हथियार' से बेअसर नई भुगतान प्रणाली के बारे में बताया
13:20 12.08.2026 (अपडेटेड: 14:46 12.08.2026)

© Sputnik / Natalia Seliverstova
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प्रोमस्व्याज़बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्योत्र फ्रादकोव ने रूसी मीडिया को बैंक के नए पेमेंट सिस्टम A7 की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सिस्टम SWIFT या डॉलर जैसी पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों के बिना भी आसानी से सीमा-पार भुगतान कर सकता है, और तकनीकी रूप से इसमें किसी भी प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं होता।
फ्रादकोव ने पारंपरिक वैश्विक भुगतान प्रणालियों और डॉलर को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने इसे 'सॉफ्ट पावर' का ऐसा जरिया बताया जो आज पूरी दुनिया के लेन-देन को नियंत्रित कर रहा है। फ्रादकोव ने जोर देकर कहा कि "सिर्फ डॉलर से दूरी बनाना काफी नहीं है, बल्कि विदेशी वित्तीय प्रणालियों पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने के लिए भी काम करना होगा।"
प्रोमस्व्याज़बैंक की A7 सीमा-पार भुगतान प्रणाली की परियोजना ऐसे ही साधनों में से एक है। यह प्रणाली:
बिना तीसरे पक्ष के रूबल से जुड़ी विशेष स्टेबलकॉइन के माध्यम से भुगतान करने की सुविधा देती है। ये स्टेबलकॉइन अब दुनिया की सबसे बड़ी गैर-डॉलर वाली स्टेबलकॉइन बन चुकी हैं (अब तक 140 अरब डॉलर का टर्नओवर)
विभिन्न देशों में अलग-अलग मुद्राओं में वितरित लिक्विडिटी पूल का इस्तेमाल करती है। तकनीकी रूप से किसी प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं होता, "क्योंकि इसमें वास्तव में कोई सीमा पार भुगतान नहीं होते हैं।"
इसे खरबों डॉलर के बराबर मूल्य वाले लेनदेन की वैश्विक प्रणाली से जुड़ने के लिए बनाया गया है।
फ्रादकोव ने जोर देकर कहा कि "ये लेन-देन असल में डॉलर से जुड़े नहीं हैं। यह सिस्टम उस बाज़ार हिस्सेदारी को दर्शाता है जो आगे चलकर बढ़ेगी और आने वाले समय में पश्चिमी देशों के मौजूदा सिस्टम का एक असली विकल्प बन सकती है।" उन्होंने यह भी इशारा किया कि ब्राजील, तुर्की और कजाकिस्तान जैसे देश भी इस तरह के प्रयोग शुरू कर चुके हैं।
उन्होंने कहा, "दुनिया इस धारणा से दूर जा रही है कि एक एकल सार्वभौमिक भुगतान प्रणाली है जिसके माध्यम से सभी लेन-देन करने होंगे। राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर-क्षेत्रीय प्रणालियां आकार ले रही हैं, जो बैंकों, भुगतान प्रणालियों, लॉजिस्टिक्स मार्गों और टेक प्लेटफॉर्मों की तरह ही एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करेंगे।"
प्योत्र फ्रादकोव ने कहा कि आधुनिक दुनिया में, "देश अब वस्तुओं पर ही नहीं, बल्कि… वित्तपोषण क्षमताओं पर भी प्रतिस्पर्धा करने लगे हैं", यानी ऐसी भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराने की क्षमता, जिसे अवरुद्ध या प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है।
शीर्ष बैंक अधिकारी ने साक्षात्कार के अंत में कहा, "हम एक ऐसी व्यवस्था की बात कर रहे हैं, जहां विदेशी व्यापार पूरी तरह से इस बात पर टिक जाता है कि भुगतान का नेटवर्क कितना मजबूत है। यहां दो पहलू हैं: पहला, भुगतान व्यवस्था पर नियंत्रण और उसकी स्वतंत्रता (अर्थात सुरक्षा), और दूसरा, आर्थिक स्थिरता। कई क्षेत्रों में पारंपरिक बैंकिंग अब महंगी और धीमी हो गई है और इसका प्रतिबंधों से कोई लेना-देना नहीं है।"
