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T-72 और T-90 ओवरहाल सुविधा भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नया बढ़ावा देगी: भारत के रक्षा मंत्री

© AP Photo / Kevin FrayerIndian soldiers ride in T-72 tanks in the fog in preparation for Republic Day celebrations near the Presidential Palace in New Delhi, India, Tuesday, Jan. 17, 2012.
Indian soldiers ride in T-72 tanks in the fog in preparation for Republic Day celebrations near the Presidential Palace in New Delhi, India, Tuesday, Jan. 17, 2012. - Sputnik भारत, 1920, 27.08.2026
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भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में ₹450 करोड़ (लगभग 47.1 मिलियन डॉलर) की लागत से T-सीरीज़ टैंक के तकनीकी उन्नयन और ओवरहॉल के लिए एक रणनीतिक सुविधा केंद्र की परियोजना की आधारशिला रखी।
भारतीय सेना के पास रूसी मूल के लगभग 2,400 T-72 और 1,600 T-90 टैंक हैं, जो भारत की टैंक क्षमता का आधार है।
इस सुविधा में टैंकों का ओवरहॉल और तकनीकी उन्नयन किया जाएगा, जिससे उनकी सेवा अवधि बढ़ेगी और भारतीय सेना के बख़्तरबंद बेड़े को मजबूती मिलेगी। यह परियोजना देश में टैंकों के रखरखाव और सेवा-क्षमता को भी बढ़ाएगी। इससे विदेशों में रखरखाव पर निर्भरता कम होगी और जबलपुर की रक्षा उत्पादन तथा ओवरहॉल के प्रमुख केंद्र के रूप में भूमिका और मजबूत होगी।
रक्षा मंत्री ने इस परियोजना को भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, औद्योगिक क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मविश्वास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ड्रोन, मिसाइल, सैटेलाइट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर युद्ध के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद टैंक आधुनिक युद्ध में प्रासंगिक बने हुए हैं। उन्होंने आर्मर्ड प्लेटफॉर्म को धीरे-धीरे खत्म करने के बजाय उन्हें आधुनिक बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में बोलते हुए सिंह ने कहा कि प्रौद्योगिकी और युद्ध के तौर-तरीकों में बदलाव के साथ टैंकों की भूमिका भी बदली है, लेकिन ज़मीनी लड़ाई में उनकी ज़रूरत खत्म नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि टैंकों की ताकत उनकी गतिशीलता, सुरक्षा और मारक क्षमता के सामंजस्य में है, जिससे वे दुर्गम इलाकों में भी सैनिकों को सुरक्षित गतिशीलता प्रदान कर पाते हैं।

"इसलिए, आज ज़रूरत टैंकों को खत्म करने की नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक बनाने की है। उन्हें आधुनिक युद्धक्षेत्र की ज़रूरतों के हिसाब से बेहतर सेंसर और क्षमताओं से लैस करने की ज़रूरत है," भारतीय रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया।

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