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भारतीय नौसेना में शामिल हुआ आईएनएस निपुण, गहरे समुद्र में चलाएगा सबमरीन बचाव अभियान
भारतीय नौसेना में शामिल हुआ आईएनएस निपुण, गहरे समुद्र में चलाएगा सबमरीन बचाव अभियान
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भारतीय नौसेना में दूसरा और इस श्रेणी का अंतिम डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) निपुण शामिल हो गया है। निपुण संकटग्रस्त सबमरीन में फंसे नौसैनिकों को बचाने का... 31.08.2026, Sputnik भारत
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1989 में सोवियत संघ से लिए गए ऐसे ही पोत के सेवानिवृत्त होने के बाद भारत संकटग्रस्त सबमरीन कर्मियों को बचाने के लिए व्यावसायिक डाइविंग सपोर्ट वेसल पर ही निर्भर था।निपुण का भार 9,350 टन है और यह 388 फीट लंबा है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण प्रणाली डीप-सबमर्जेन्स रेस्क्यू व्हीकल (DSRV) है, जो समुद्र की गहराई में जाकर संकटग्रस्त सबमरीन में फंसे नौसैनिकों को बचाकर ला सकता है। भारतीय नौसेना ने कुछ समय पहले 3,300 फीट तक की गहराई में किसी सबमरीन का पता लगाने वाला DSRV खरीदा है। यह 2,130 फीट की गहराई तक जाकर सबमरीन में फंसे नौसैनिकों को बचा सकता है।भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला पहला डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निस्तार है, जो पिछले वर्ष जुलाई से नौसेना में काम कर रहा है। इसे भारत के पूर्वी समुद्री तट पर बंगाल की खाड़ी के विशाखापट्टनम बंदरगाह में तैनात किया गया है। निपुण को पश्चिमी समुद्री तट पर मुंबई बंदरगाह में तैनात किया जाएगा, जहां से वह अरब सागर के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी भी संकटग्रस्त सबमरीन के बचाव अभियान के लिए तैयार रहेगा।भारतीय नौसेना के पास इस समय रूसी मूल की 6 सिंधुघोष श्रेणी की पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन के अलावा 6 स्वदेशी कलवरी श्रेणी और 4 शिशुमार श्रेणी की सबमरीन हैं। इनके अतिरिक्त अरिहंत श्रेणी की 3 परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन भी हैं।भारत 6 नई डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन के अलावा 2 परमाणु सबमरीन भी बना रहा है। रूस से एक अन्य परमाणु सबमरीन के भी 2028 तक भारतीय नौसेना में शामिल होने की संभावना है। लगातार बढ़ते सबमरीन बेड़े के लिए भारतीय नौसेना को बचाव अभियान चलाने में सक्षम निपुण जैसे पोतों की आवश्यकता है।
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भारत, भारतीय नौसेना, युद्धपोत, बंगाल की खाड़ी, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, मुंबई, सोवियत संघ, रूस
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भारतीय नौसेना में शामिल हुआ आईएनएस निपुण, गहरे समुद्र में चलाएगा सबमरीन बचाव अभियान
भारतीय नौसेना में दूसरा और इस श्रेणी का अंतिम डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) निपुण शामिल हो गया है। निपुण संकटग्रस्त सबमरीन में फंसे नौसैनिकों को बचाने का महत्वपूर्ण काम करता है। भारत अपने सबमरीन बेड़े को और शक्तिशाली बना रहा है, इसलिए ऐसे पोतों की उसकी आवश्यकता भी बढ़ रही है।
1989 में सोवियत संघ से लिए गए ऐसे ही पोत के सेवानिवृत्त होने के बाद भारत संकटग्रस्त सबमरीन कर्मियों को बचाने के लिए व्यावसायिक डाइविंग सपोर्ट वेसल पर ही निर्भर था।
निपुण का भार 9,350 टन है और यह 388 फीट लंबा है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण प्रणाली डीप-सबमर्जेन्स रेस्क्यू व्हीकल (DSRV) है, जो समुद्र की गहराई में जाकर संकटग्रस्त सबमरीन में फंसे नौसैनिकों को बचाकर ला सकता है। भारतीय नौसेना ने कुछ समय पहले 3,300 फीट तक की गहराई में किसी सबमरीन का पता लगाने वाला DSRV खरीदा है। यह 2,130 फीट की गहराई तक जाकर सबमरीन में फंसे नौसैनिकों को बचा सकता है।
DSRV में चालक दल के 3 सदस्य होते हैं और यह एक बार में 14 नौसैनिकों को सबमरीन से सुरक्षित निकाल सकता है। इसे हवाई मार्ग से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है, लेकिन समुद्र में उतारने के लिए निपुण जैसे विशेष पोत की आवश्यकता होती है।
भारतीय नौसेना में शामिल होने वाला पहला डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निस्तार है, जो पिछले वर्ष जुलाई से नौसेना में काम कर रहा है। इसे भारत के पूर्वी समुद्री तट पर बंगाल की खाड़ी के विशाखापट्टनम बंदरगाह में तैनात किया गया है। निपुण को पश्चिमी समुद्री तट पर मुंबई बंदरगाह में तैनात किया जाएगा, जहां से वह अरब सागर के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी भी संकटग्रस्त सबमरीन के बचाव अभियान के लिए तैयार रहेगा।
भारतीय नौसेना के पास इस समय रूसी मूल की 6 सिंधुघोष श्रेणी की पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन के अलावा 6 स्वदेशी कलवरी श्रेणी और 4 शिशुमार श्रेणी की सबमरीन हैं। इनके अतिरिक्त अरिहंत श्रेणी की 3 परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन भी हैं।
भारत 6 नई डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन के अलावा 2 परमाणु सबमरीन भी बना रहा है। रूस से एक अन्य परमाणु सबमरीन के भी 2028 तक भारतीय नौसेना में शामिल होने की संभावना है। लगातार बढ़ते सबमरीन बेड़े के लिए भारतीय नौसेना को बचाव अभियान चलाने में सक्षम निपुण जैसे पोतों की आवश्यकता है।