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भारत में हवा में तैरकर शत्रु पर प्रहार करने वाले ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया गया
भारत में हवा में तैरकर शत्रु पर प्रहार करने वाले ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया गया
Sputnik भारत
भारतीय वायुसेना ने लंबी दूरी तक मार करने वाले ग्लाइड बम खगांतक-243 का पहला परीक्षण किया है। भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में इस परीक्षण को... 03.09.2026, Sputnik भारत
2026-09-03T18:00+0530
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खगांतक का प्रयोग शत्रु के मज़बूत लक्ष्यों के विरुद्ध किया जा सकता है। खगांतक का निर्माण एक स्टार्टअप जेएसआर डायनामिक्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने मिलकर किया है। परीक्षण के दौरान खगांतक को भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 लड़ाकू जेट से गिराया गया। भारतीय वायुसेना ने इस बम की खरीद के लिए आदेश दे दिए हैं। ग्लाइड बम के प्रयोग शत्रु के रनवे, कंक्रीट के भवनों और पक्के मोर्चों के विरुद्ध किया जा सकता है।ग्लाइड बम के मिसाइल की तरह किसी प्रोपेल्शन की आवश्यकता नहीं होती बल्कि वह हवा के सहारे ही उड़ान भरता है। इसलिए उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन सस्ता होता है, साथ ही उन्हें रडार पर पहचानना कठिन होता है। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन भी 1000 किग्रा भार के ग्लाइड बम गौरव का परीक्षण कर चुका है। भारतीय वायुसेना अभी तक ऐसे बमों के लिए आयात पर ही निर्भर थी पर अब आत्मनिर्भर भारत की दिशा में इन बमों का उत्पादन भारत में करने की तैयारी है।
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भारत, आत्मनिर्भर भारत, रक्षा मंत्रालय (mod), भारतीय वायुसेना, सुखोई-30mki , drdo
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भारत में हवा में तैरकर शत्रु पर प्रहार करने वाले ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया गया
भारतीय वायुसेना ने लंबी दूरी तक मार करने वाले ग्लाइड बम खगांतक-243 का पहला परीक्षण किया है। भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में इस परीक्षण को सफल बताते हुए सटीकता, शक्ति और गर्व का प्रतीक बताया है।
खगांतक का प्रयोग शत्रु के मज़बूत लक्ष्यों के विरुद्ध किया जा सकता है। खगांतक का निर्माण एक स्टार्टअप जेएसआर डायनामिक्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने मिलकर किया है। परीक्षण के दौरान खगांतक को भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 लड़ाकू जेट से गिराया गया।
खगांतक-243 अपने साथ 125 किलोग्राम भार का विस्फोटक लेकर 140 से 180 किलोमीटर तक शत्रु के ठिकानों पर प्रहार कर सकता है। इसे गिराने के लिए वायुसेना के पायलट को शत्रु की हवाई सीमा के अंदर जाने की आवश्यकता नहीं होती। इस ग्लाइड बम के भारी और लंबी मारक क्षमता वाले संस्करण भी तैयार किए जा रहे हैं।
भारतीय वायुसेना ने इस बम की खरीद के लिए आदेश दे दिए हैं। ग्लाइड बम के प्रयोग शत्रु के रनवे, कंक्रीट के भवनों और पक्के मोर्चों के विरुद्ध किया जा सकता है।
ग्लाइड बम के मिसाइल की तरह किसी प्रोपेल्शन की आवश्यकता नहीं होती बल्कि वह हवा के सहारे ही उड़ान भरता है। इसलिए उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन सस्ता होता है, साथ ही उन्हें रडार पर पहचानना कठिन होता है। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन भी 1000 किग्रा भार के ग्लाइड बम गौरव का परीक्षण कर चुका है। भारतीय वायुसेना अभी तक ऐसे बमों के लिए आयात पर ही निर्भर थी पर अब आत्मनिर्भर भारत की दिशा में इन बमों का उत्पादन भारत में करने की तैयारी है।