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भारत ने समुद्री अनुसंधान को ताकत देने के लिए लॉन्च किया अत्याधुनिक रिसर्च पोत
भारत ने समुद्री अनुसंधान को ताकत देने के लिए लॉन्च किया अत्याधुनिक रिसर्च पोत
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भारत ने समुद्र विज्ञान और समुद्री तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए एक अत्याधुनिक समुद्री अनुसंधान पोत ORV सागर मंथन बुधवार को कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में लॉन्च किया।
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भारत ने समुद्र विज्ञान और समुद्री तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए बुधवार को कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में अत्याधुनिक समुद्री अनुसंधान पोत ORV सागर मंथन लॉन्च किया। इस पोत को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और उनकी पत्नी मंजू सिंह ने वर्चुअली लॉन्च किया।मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे NCPOR, मंत्रालय और देश के लिए "यादगार दिन" बताया। उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के सिर्फ़ दो साल के अंदर और जहाज की कील बिछाने के बाद मुश्किल से पांच महीने के भीतर इसे लॉन्च करने के लिए टीम की तारीफ की।मंत्री सिंह ने आगे कहा कि ORV सागर मंथन जैसे जहाजों द्वारा जुटाया गया ठोस और भरोसेमंद डेटा भारत को आपदाओं की रोकथाम में वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने, पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाने और वैश्विक समुद्री भू-राजनीति में अहम भूमिका निभाने में मदद करेगा।भारत सरकार के महत्वाकांक्षी डीप ओशन मिशन (DOM) के तहत करीब 840 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया ORV सागर मंथन हर मौसम में काम करने वाला एक बहुउद्देशीय अनुसंधान पोत है। इसे दक्षिणी महासागर समेत बेहद खराब समुद्री परिस्थितियों में भी काम करने के लिए बनाया गया है और इसकी अनुमानित परिचालन अवधि 30 साल है।
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भारत ने समुद्री अनुसंधान को ताकत देने के लिए लॉन्च किया अत्याधुनिक रिसर्च पोत
इस पोत का निर्माण पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के तहत नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR) के लिए रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने किया है।
भारत ने समुद्र विज्ञान और समुद्री तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए बुधवार को कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में अत्याधुनिक समुद्री अनुसंधान पोत ORV सागर मंथन लॉन्च किया। इस पोत को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और उनकी पत्नी मंजू सिंह ने वर्चुअली लॉन्च किया।
मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे NCPOR, मंत्रालय और देश के लिए "यादगार दिन" बताया। उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के सिर्फ़ दो साल के अंदर और जहाज की कील बिछाने के बाद मुश्किल से पांच महीने के भीतर इसे लॉन्च करने के लिए टीम की तारीफ की।
जहाज की रणनीतिक और वैज्ञानिक जरूरतों पर जोर देते हुए मंत्री जितेंद्र सिंह ने अपने संदेश में कहा, “यह शानदार पोत GRSE द्वारा बनाया गया भारत का पहला अत्याधुनिक समुद्री अनुसंधान पोत है, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए एक जरूरी कदम को दर्शाता है। आज दुनिया हमारे समुद्रों के बारे में बहुत कम जानती है, जबकि समुद्रों का अध्ययन पिघलते ध्रुवीय ग्लेशियरों, समुद्री बदलावों और जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए बेहद जरूरी है।"
मंत्री सिंह ने आगे कहा कि ORV सागर मंथन जैसे जहाजों द्वारा जुटाया गया ठोस और भरोसेमंद डेटा भारत को आपदाओं की रोकथाम में वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने, पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाने और वैश्विक समुद्री भू-राजनीति में अहम भूमिका निभाने में मदद करेगा।
डॉ. सिंह ने कहा,"विशेषताओं से भरपूर ORV सागर मंथन धीरे-धीरे मशहूर 43 साल पुराने ORV सागर कन्या की जगह लेगा, जिसे 1983 में जर्मनी से खरीदा गया था।"
भारत सरकार के महत्वाकांक्षी डीप ओशन मिशन (DOM) के तहत करीब 840 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया ORV सागर मंथन हर मौसम में काम करने वाला एक बहुउद्देशीय अनुसंधान पोत है। इसे दक्षिणी महासागर समेत बेहद खराब समुद्री परिस्थितियों में भी काम करने के लिए बनाया गया है और इसकी अनुमानित परिचालन अवधि 30 साल है।