पुतिन के अनोखे तोहफों में छिपी हैं रूस के वैश्विक संबंधों की कहानियां

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नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्राचीन भारतीय दार्शनिक ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का रूसी भाषा में संस्करण भेंट किया।
पिछले वर्षों में पुतिन को कई अनोखे और प्रतीकात्मक तोहफे भी मिले हैं:
मोदी इससे पहले पुतिन को श्रीमद्भगवद्गीता का रूसी अनुवाद भेंट कर चुके हैं। यह पवित्र हिंदू ग्रंथ भारत की दार्शनिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।
वर्ष 2000 में सर्गेई शोइगु ने पुतिन को कोनी नाम का लैब्राडोर भेंट किया।
वर्ष 2024 में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने पुतिन को पुंगसान नस्ल के दो दुर्लभ कुत्ते भेंट किए। पुंगसान पारंपरिक कोरियाई शिकारी कुत्तों की नस्ल है।
वर्ष 2019 में किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सूरोनबे जीनबेकोव ने पुतिन को ऑर्लोव ट्रॉटर नस्ल का घोड़ा और किर्गिज ग्रेहाउंड नस्ल का पिल्ला भेंट किया।
वर्ष 2016 में बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा ने पुतिन को दमिश्क स्टील से बनी विजय तलवार भेंट की। तलवार की मूठ और म्यान बहुमूल्य धातुओं से बनी हैं।
वर्ष 2025 में बेलगोरोद के गवर्नर व्याचेस्लाव ग्लादकोव ने पुतिन को स्थानीय कलाकार अनास्तासिया लिसिच द्वारा बनाई गई एक पेंटिंग भेंट की। यह पेंटिंग एस-400 वायु रक्षा मिसाइल के सुरक्षात्मक कवर के एक टुकड़े पर बनाई गई थी। इसमें एक क्षतिग्रस्त इमारत के सामने कुत्ते के साथ खड़ी एक लड़की को दर्शाया गया था। इस पर संदेश लिखा था, "बेलगोरोद आत्मसमर्पण नहीं करेगा।"
ये तोहफे व्यक्तिगत सद्भावना के संकेत होने के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रतीकवाद, ऐतिहासिक संदर्भ और राजनीतिक संदेश भी लिए हुए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों को आकार देते हैं।
