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भारतीय वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु और चिली में मंगल जैसी जियोलॉजिकल जगहों की पहचान की
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भारतीय वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु और चिली में मंगल ग्रह जैसी भूवैज्ञानिक संरचनाओं वाले स्थलों की पहचान की है, इससे मंगल ग्रह पर पानी से जुड़ी गतिविधियों के इतिहास और रहने लायक जगहों के बारे में नई जानकारी मिल सकती है।
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केरल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने तमिलनाडु और चिली के उन क्षेत्रों में दो जलयुक्त सल्फेट खनिजों, मेलानटेराइट और जिप्सम की पहचान की है, जिनकी भूवैज्ञानिक, रासायनिक और भौतिक विशेषताएं मंगल ग्रह से समानता रखती हैं।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मुताबिक, इन नतीजों से वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर पानी से जुड़ी पुरानी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने और ऐसे स्थानों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां कभी जीवन मौजूद होने की संभावना रही हो।मेलानटेराइट और जिप्सम दोनों जलयुक्त सल्फेट खनिज हैं, जो पानी और चट्टानों के बीच होने वाली प्रक्रियाओं के प्रमाण देते हैं। इसलिए ये मंगल ग्रह के भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण संकेतक हैं।इस शोध के निष्कर्ष 'जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स' में दो शोध-पत्रों के रूप में प्रकाशित हुए हैं, जो कि ग्रहीय अनुसंधान को समर्पित एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका है।
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भारतीय वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु और चिली में मंगल जैसी जियोलॉजिकल जगहों की पहचान की
भारतीय वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु और चिली में मंगल ग्रह जैसी भूवैज्ञानिक संरचनाओं वाले स्थलों की पहचान की है, इससे मंगल ग्रह पर पानी से जुड़ी गतिविधियों के इतिहास और रहने लायक जगहों के बारे में नई जानकारी मिल सकती है।
केरल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने तमिलनाडु और चिली के उन क्षेत्रों में दो जलयुक्त सल्फेट खनिजों, मेलानटेराइट और जिप्सम की पहचान की है, जिनकी भूवैज्ञानिक, रासायनिक और भौतिक विशेषताएं मंगल ग्रह से समानता रखती हैं।
तमिलनाडु के नेवेली में 'मेलानटेराइट' खनिज मिला है, जबकि चिली के अटाकामा मरुस्थल और तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के बीहड़ क्षेत्र में 'जिप्सम' की मौजूदगी पाई गई है। ये सभी अर्ध-शुष्क और न्यूनतम वर्षा वाले क्षेत्र हैं, जिनका उपयोग पृथ्वी के प्राचीन जलवायु इतिहास और विशिष्ट भूगर्भीय संरचनाओं के अध्ययन के लिए किया जाता है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मुताबिक, इन नतीजों से वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर पानी से जुड़ी पुरानी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने और ऐसे स्थानों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां कभी जीवन मौजूद होने की संभावना रही हो।
मेलानटेराइट और जिप्सम दोनों जलयुक्त सल्फेट खनिज हैं, जो पानी और चट्टानों के बीच होने वाली प्रक्रियाओं के प्रमाण देते हैं। इसलिए ये मंगल ग्रह के भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण संकेतक हैं।
इस शोध के निष्कर्ष 'जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स' में दो शोध-पत्रों के रूप में प्रकाशित हुए हैं, जो कि ग्रहीय अनुसंधान को समर्पित एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका है।