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समुद्र में बढ़ेगी भारत की ताकत, पहला स्वदेशी बहुउपयोगी पोत समर्थक नौसेना में शामिल
समुद्र में बढ़ेगी भारत की ताकत, पहला स्वदेशी बहुउपयोगी पोत समर्थक नौसेना में शामिल
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भारतीय नौसेना ने स्वदेश निर्मित बहुउद्देशीय युद्धपोत 'आईएनएस समर्थक' को कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर आयोजित एक समारोह में आधिकारिक रूप से बेड़े में शामिल... 16.10.2026, Sputnik भारत
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आईएनएस समर्थक को भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी लार्सन एंड टूब्रो ने डिज़ाइन किया है और इसका निर्माण भी भारत में ही हुआ है। यह किसी निजी भारतीय शिपयार्ड में बना पहला बड़ा युद्धपोत है। इस पोत को मुख्य रूप से परीक्षण और मूल्यांकन के लिए तैयार किया गया है, लेकिन यह कई अन्य भूमिकाएं भी निभा सकता है।यह पोत निगरानी कर सकता है, समुद्र में गश्त लगा सकता है और आपदा के समय मानवीय सहायता प्रदान कर सकता है। नई और गैरपरंपरागत समुद्री चुनौतियों से निपटने में इस पोत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित कारवार सैन्य बंदरगाह से यह युद्धपोत अरब सागर और हिंद महासागर की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभालेगा।आईएनएस समर्थक का भार 3750 टन और लंबाई 107 मीटर है। यह 15 समुद्री मील प्रति घंटे की गति से 4500 समुद्री मील तक की यात्रा कर सकता है और इसमें 116 नौसैनिक तैनात किए जा सकते हैं। इसमें आधुनिक रडार, संचार और निगरानी प्रणालियां लगाई गई हैं।इसका मुख्य काम निगरानी, चौकसी और गश्त लगाना है, इसलिए इसे इन कार्यों के लिए उपयुक्त उपकरणों से लैस किया गया है। हालांकि कम तीव्रता के नौसैनिक अभियानों के लिए इसमें एक 76 मिमी की नौसैनिक तोप के अतिरिक्त 30 मिमी की दो ऑटोकैनन और छोटी नौकाओं पर आक्रमण के लिए 12.7 मिमी की दो रिमोट से संचालित मशीनगनें लगाई गई हैं।इसमें दुश्मन के जहाजों या पनडुब्बियों पर हमला करने के लिए लंबी दूरी के भारी 'वरुणास्त्र' टॉरपीडो, मध्यम दूरी के 'श्येन' टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट लगे हैं।
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भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारतीय नौसेना, अरब सागर, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, पनडुब्बी, कर्नाटक
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समुद्र में बढ़ेगी भारत की ताकत, पहला स्वदेशी बहुउपयोगी पोत समर्थक नौसेना में शामिल
15:11 16.10.2026 (अपडेटेड: 15:43 16.10.2026) भारतीय नौसेना ने स्वदेश निर्मित बहुउद्देशीय युद्धपोत 'आईएनएस समर्थक' को कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर आयोजित एक समारोह में आधिकारिक रूप से बेड़े में शामिल कर लिया है। यह इस श्रेणी के दो पोतों में से पहला है। समारोह के मुख्य अतिथि, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के भारत के प्रयासों की सराहना की।
आईएनएस समर्थक को भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी लार्सन एंड टूब्रो ने डिज़ाइन किया है और इसका निर्माण भी भारत में ही हुआ है। यह किसी निजी भारतीय शिपयार्ड में बना पहला बड़ा युद्धपोत है। इस पोत को मुख्य रूप से परीक्षण और मूल्यांकन के लिए तैयार किया गया है, लेकिन यह कई अन्य भूमिकाएं भी निभा सकता है।
यह पोत निगरानी कर सकता है, समुद्र में गश्त लगा सकता है और आपदा के समय मानवीय सहायता प्रदान कर सकता है। नई और गैरपरंपरागत समुद्री चुनौतियों से निपटने में इस पोत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित कारवार सैन्य बंदरगाह से यह युद्धपोत अरब सागर और हिंद महासागर की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभालेगा।
आईएनएस समर्थक का भार 3750 टन और लंबाई 107 मीटर है। यह 15 समुद्री मील प्रति घंटे की गति से 4500 समुद्री मील तक की यात्रा कर सकता है और इसमें 116 नौसैनिक तैनात किए जा सकते हैं। इसमें आधुनिक रडार, संचार और निगरानी प्रणालियां लगाई गई हैं।
इसका मुख्य काम निगरानी, चौकसी और गश्त लगाना है, इसलिए इसे इन कार्यों के लिए उपयुक्त उपकरणों से लैस किया गया है। हालांकि कम तीव्रता के नौसैनिक अभियानों के लिए इसमें एक 76 मिमी की नौसैनिक तोप के अतिरिक्त 30 मिमी की दो ऑटोकैनन और छोटी नौकाओं पर आक्रमण के लिए 12.7 मिमी की दो रिमोट से संचालित मशीनगनें लगाई गई हैं।
इसमें दुश्मन के जहाजों या पनडुब्बियों पर हमला करने के लिए लंबी दूरी के भारी 'वरुणास्त्र' टॉरपीडो, मध्यम दूरी के 'श्येन' टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट लगे हैं।