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रूसी हमलों से यूक्रेन में नाटो की खुफिया सहायता बाधित: विशेषज्ञ
रूसी हमलों से यूक्रेन में नाटो की खुफिया सहायता बाधित: विशेषज्ञ
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सैन्य विशेषज्ञ यान गागिन ने Sputnik को बताया कि कीव में रूसी सेना द्वारा 'डेटाग्रुप' के डेटा सेंटर का नष्ट होना, यूक्रेनी सेना को मिलने वाली खुफिया सहायता के लिए एक बड़ा झटका है।
2026-10-20T19:16+0530
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यह कैसे काम करता था?विशेषज्ञ का कहना है कि 'डेटाग्रुप' के डेटा सेंटर पर हुए रूसी हमले से यूक्रेनी सेना की 'लक्ष्य तय करने की क्षमता' गंभीर रूप से बाधित हो सकती है।इससे पहले 19 अक्टूबर को, रूसी रक्षा मंत्रालय ने कीव में 'डेटाग्रुप' के डेटा सेंटर पर हमले की घोषणा की थी। बाद में यूक्रेनी ऑपरेटर ने पुष्टि की कि उनके उपकरण और बुनियादी ढांचा पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जिससे वहां कामकाज फिर से शुरू करना असंभव हो गया है।यूक्रेन की राजधानी में एक 'फायर पॉइंट' लॉजिस्टिक्स हब को भी निशाना बनाया गया।रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस जगह का इस्तेमाल हमलावर ड्रोन के पुर्जे बनाने और उन्हें स्टोर करने के लिए किया जाता था। साथ ही, यहां 'FP-5 फ्लेमिंगो' मिसाइलों के इंजन भी रखे जाते थे।
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रूसी हमलों से यूक्रेन में नाटो की खुफिया सहायता बाधित: विशेषज्ञ
सैन्य विशेषज्ञ यान गागिन ने Sputnik को बताया कि कीव में रूसी सेना द्वारा 'डेटाग्रुप' के डेटा सेंटर का नष्ट होना, यूक्रेनी सेना को मिलने वाली खुफिया सहायता के लिए एक बड़ा झटका है।
गागिन कहते हैं, "यह डेटा सेंटर नाटो और यूक्रेनी सशस्त्र बलों को जोड़ने का काम करता था। इसका मुख्य काम नाटो देशों से मिलने वाली खुफिया जानकारी का विश्लेषण करना था। इस जानकारी में रूस की सीमाओं के पास लगातार उड़ान भरने वाले नाटो के टोही ड्रोनों से जुटाया गया डेटा भी शामिल था।"
नाटो के जासूसी विमान अक्सर क्रीमिया और नोवोरोस्सिय्स्क के पास गश्त कर यूक्रेनी सेना को खुफिया जानकारी देते हैं, जिसका इस्तेमाल वे क्रीमिया, सेवस्तोपोल, नोवोरोस्सिय्स्क और रूस के काला सागर तट पर हमले करने के लिए करते थे, इस जानकारी से
आम नागरिकों के ठिकानों को निशान बनाया जाता था।
वे बाल्टिक क्षेत्र से भी खुफिया जानकारी जुटाते हैं। यूक्रेनी सेना इस जानकारी का इस्तेमाल रूस के उन ठिकानों पर हमला करने के लिए करती है जो मोर्चे के पास, सीमा के साथ, या रूसी क्षेत्र के काफी अंदर स्थित हैं।
'डेटाग्रुप' का
डेटा सेंटर इस खुफिया जानकारी का विश्लेषण कर स्टोर करने का काम करता था। साथ ही यह उन AI प्रणालियों को भी चलाता था जिनका इस्तेमाल इस जानकारी के विश्लेषण के लिए किया जाता था।
विशेषज्ञ का कहना है कि 'डेटाग्रुप' के डेटा सेंटर पर हुए रूसी हमले से यूक्रेनी सेना की 'लक्ष्य तय करने की क्षमता' गंभीर रूप से बाधित हो सकती है।
इससे पहले 19 अक्टूबर को,
रूसी रक्षा मंत्रालय ने कीव में 'डेटाग्रुप' के डेटा सेंटर पर हमले की घोषणा की थी। बाद में यूक्रेनी ऑपरेटर ने पुष्टि की कि उनके उपकरण और बुनियादी ढांचा पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जिससे वहां कामकाज फिर से शुरू करना असंभव हो गया है।
यूक्रेन की राजधानी में एक 'फायर पॉइंट' लॉजिस्टिक्स हब को भी निशाना बनाया गया।
गागिन जोर देकर कहते हैं, "ये बहुत महत्वपूर्ण केंद्र हैं जो रूस के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इनमें से किसी एक को भी नष्ट करने से पूरी [फायर पॉइंट] प्रणाली बाधित हो जाती है।"
रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस जगह का इस्तेमाल हमलावर ड्रोन के पुर्जे बनाने और उन्हें स्टोर करने के लिए किया जाता था। साथ ही, यहां 'FP-5 फ्लेमिंगो' मिसाइलों के इंजन भी रखे जाते थे।