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भारतीय नौसेना के लिए बनेंगे 8 स्वदेशी युद्धपोत, 53,866 करोड़ रुपए का सौदा

© Photo : X/@indiannavyIndian Navy ships arrive in Singapore as part of fleet deployment in South China Sea
Indian Navy ships arrive in Singapore as part of fleet deployment in South China Sea - Sputnik भारत, 1920, 02.11.2026
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भारत सरकार के रक्षामंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए अगली पीढ़ी के 8 कार्वेट बनाने के सौदे पर 2 नवंबर को हस्ताक्षर किए हैं। 53,866.50 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले आधुनिक अस्त्रों और संचार प्रणालियों से युक्त ये युद्धपोत हवा, समुद्र और समुद्र के भीतर से किए जाने वाले किसी भी आक्रमण को निष्प्रभावी करने में सक्षम हैं।
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि इनमें से 5 युद्धपोतों का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और तीन का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में किया जाएगा। रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में स्वदेशी युद्धपोत डिज़ाइन और निर्माण के क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही यह पहली परियोजना है जिसमें भारतीय नौसेना द्वारा डिज़ाइन किए युद्धपोत का निर्माण प्रतियोगिता के आधार पर चुने गए भारतीय सरकारी रक्षा उद्योग संस्थान में हो रहा है।
इन युद्धपोतों में एक 76 मिमी कैलिबर की मुख्य नौसैनिक स्वचालित तोप लगाई जाएगी जिससे शत्रु के युद्धपोतों पर बहुत तेज़ी से गोलीबारी की जा सकती है। शत्रु के ज़मीनी ठिकानों या पोतों पर प्रहार करने के लिए इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली 8 लंबी दूरी की मिसाइलें लगाई जाएंगी। हवाई आक्रमण से बचाव के लिए 24 एंटी मिसाइल डिफेंस प्रणालियां हैं और सबमरीन से निबटने के लिए टारपीडो लगाए गए हैं।
इन युद्धपोतों की लंबाई 120 मीटर तक होगी और इनका भार 3800 से लेकर 4000 टन तक होगा। इनकी अधिकतम गति 30 नॉट तक होगी और ये एक बार में 4000 समुद्री मील की यात्रा कर सकेंगे। इनमें 160 नौसैनिक और 21 अधिकारी तैनात किए जा सकेंगे साथ ही 7 मीटर लंबी तीव्र गति से चलने वाली नाव भी रखी जा सकेगी।
चौकसी और निगरानी के लिए समुद्र की सतह और हवा में काम करने वाले रडार लगाए जाएंगे। समुद्र के अंदर की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए पोत में एक सोनार लगाया जाएगा, एक अतिरिक्त सोनार पोत से संबद्ध केबल से लगाया जाएगा जो कई किलोमीटर दूर तक जा सकेगा।
भारतीय नौसेना अभी अलग-अलग श्रेणी के 25 कार्वेट्स प्रयोग करती है जो समुद्र तटवर्ती क्षेत्रों के अतिरिक्त व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा करते हैं। इन आधुनिक युद्धपोतों के आने के बाद नौसेना की हिंद-प्रशांत क्षेत्र, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा करने की क्षमता में वृद्धि होगी।
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