सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में 20 मिलियन से अधिक अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी रहते हैं। केंद्र सरकार लगातार इस प्रयास में लगी हुई है कि इस स्थिति से निपटा जा सके और देश के लिए उत्पन्न इस खतरे को समय रहते खत्म किया जाए।
केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने 2016 में संसद में कहा, "बांग्लादेशी नागरिकों के बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के देश में प्रवेश करने की खबरें हैं। चूंकि देश में ऐसे बांग्लादेशी नागरिकों का प्रवेश गुप्त ढंग से और छुप छुपाकर होता है, इसलिए देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले ऐसे बांग्लादेशी नागरिकों का सटीक डेटा प्राप्त करना संभव नहीं है। उपलब्ध इनपुट के अनुसार, भारत में लगभग 20 मिलियन (2 करोड़) अवैध बांग्लादेशी प्रवासी रह रहे हैं।"
भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने Sputnik इंडिया को बताया, "ये अप्रवासी भारत में घुसपैठ कर चुके हैं और भारत में कुछ दलों द्वारा उन्हें संभावित वोट बैंक के रूप में देखा जा रहा है, इतना ही नहीं, आप विधायक को नोटिस जारी कर यह बताने के लिए बुलाया गया है कि उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए फर्जी वोटर-आईडी और आधार कार्ड पर हस्ताक्षर क्यों किए हैं।"
उन्होंने कहा, "अक्सर ये अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी घरेलू मदद, मैकेनिक, मजदूर, फल विक्रेता, कचरा इकट्ठा करने वाले आदि के रूप में काम करते हैं और क्योंकि वे सस्ते श्रम के रूप में आते हैं, जो स्थानीय लोगों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं से सस्ता है, देश में बहुत सारे लोग उनकी सेवाओं का लाभ उठाते हैं, जिससे उन्हें परिचित होने और उन इलाकों का हिस्सा बनने का मौका मिलता है जहां वे भारत में रहते हैं या काम करते हैं।"
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया कि उसने राष्ट्रीय राजधानी में बांग्लादेश से आए एक हजार से अधिक अवैध प्रवासियों को देखा है, जिसके बाद उन्हें उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।