रक्षा सूत्रों ने Sputnik इंडिया को बताया है कि तकनीकी बिंदुओं सहित सभी मुद्दों पर चर्चा पूरी हो चुकी है और अगले कुछ महीनों में इसे रक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCS) की स्वीकृति मिल जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, कुल 86 सुखोई-30 विमान अपग्रेड किए जाएंगे और पहला उन्नत सुखोई-30 स्वीकृति मिलने के दो साल में मिलने की संभावना है।
इस अपग्रेड में सबसे नए एवियोनिक्स उपकरण और स्वदेशी विरुपाक्ष रडार लगाया जाएगा। इससे जेट के अपने आसपास नज़र रखने की क्षमता में दो गुनी तक वृद्धि होगी। शत्रु के विमानों को नष्ट करने के लिए हवा से हवा में मार करने वाली स्वदेशी अस्त्र मार्क-2 मिसाइल लगाई जाएगी जिसकी रेंज 200 किमी तक होगी।
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के लिए नए स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट (EW SUITE) लगाए जाएंगे ताकि शत्रु द्वारा सिस्टम को जाम करने की आशंका समाप्त हो जाए। नया ग्लास कॉकपिट होगा जिसमें बेहतर डिस्प्ले और तेज़ी से प्रगति करने वाले स्वदेशी मिशन कम्प्यूटर होंगे। इसमें कई नए अस्त्र भी होंगे।
इस अपग्रेड के बाद सुखोई-30 अगले 25-30 वर्षों तक बेहतर काम कर पाएंगे। भारत ने रूस के साथ कुल 272 सुखोई-30 का सौदा किया था जिनमें से अधिकतर का निर्माण भारत में ही हुआ है। भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2002 में पहला सुखोई-30 शामिल किया था और तब से यह मुख्य लड़ाकू विमान के तौर पर काम कर रहा है।
भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस से लैस सुखोई-30 की दो स्क्वाड्रन बनाई हैं जिनकी भूमिका विस्तृत हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा की है। ब्रह्मोस से लैस सुखोई-30 ने पिछले वर्ष मई में पाकिस्तान के सैनिक और आतंकवादी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था।
इस समय भारतीय वायुसेना में लगभग 260 सुखोई-30 काम कर रहे हैं और लड़ाकू विमानों में उनकी संख्या सबसे ज्यादा है।