भारतीय वायुसेना द्वारा स्वदेशी रक्षा उद्योग को जारी की गई सूचना के अनुसार, लांचर्स के अतिरिक्त हवा से हवा और हवा से ज़मीन पर मार करने वाली नई स्वदेशी मिसाइलें भी खरीदी जाएंगी।
अभी तक सुखोई-30 में अलग-अलग अस्त्रों के भार के अनुसार अलग-अलग लांचर्स होते हैं। अस्त्र बदलने पर लांचर को भी बदलना पड़ता है जिसमें बहुमूल्य समय लगता है। अब सुखोई-30 में ऐसे लांचर्स होंगे जिनमें हर तरह के हवा से हवा या हवा से ज़मीन पर मार करने वाले अस्त्र लगाए जा सकेंगे।
भारतीय वायुसेना में लगभग 260 सुखोई जेट हैं जो संख्या में सबसे अधिक हैं। भारत ने रूस के साथ 15 अतिरिक्त सुखोई-30 का सौदा भी किया है जिनमें से 12 वायुसेना के लिए और 3 परीक्षणों के लिए होंगे।