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भारत में 79000 करोड़ के रक्षा उपकरणों की खरीद को स्वीकृति दी गई: रक्षा मंत्रालय

© AP Photo / Manish SwarupArmoured division of Indian army marches through the ceremonial Rajpath boulevard during India's Republic Day celebrations, in New Delhi, India, Wednesday, Jan. 26, 2022.
Armoured division of Indian army marches through the ceremonial Rajpath boulevard during India's Republic Day celebrations, in New Delhi, India, Wednesday, Jan. 26, 2022.  - Sputnik भारत, 1920, 29.12.2025
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेनाएं अपने को तेज़ी से शक्तिशाली बना रही हैं। रक्षा मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति में सूचना दी है कि लॉइटरिंग म्यूनिशन से शत्रु के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने में सहायता मिलेगी।
रक्षामंत्री की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने तीनों सेनाओं के लिए 79000 करोड़ रुपए के उपकरण और गोलाबारूद की खरीद प्रक्रिया आरंभ करने को स्वीकृति दे दी है। इनमें लॉइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम, कम ऊंचाई वाले हल्के रडार, लंबी दूरी तक मार करने वाले रॉकेट और ड्रोन और हवा से हवा में मार करने वाली स्वदेशी मिसाइल शामिल हैं।
कम ऊंचाई वाले हल्के रडार छोटे आकार के कम ऊंचाई पर उड़ने वाले शत्रु के ड्रोन की सूचना देंगे और लंबी दूरी के पिनाका रॉकेट से शत्रु पर सटीक प्रहार किया जा सकेगा। ड्रोन हमलों से कारगर सुरक्षा के लिए एकीकृत ड्रोन पहचान और अवरोधन प्रणाली Mk-II की खरीद भी की जाएगी।
भारतीय नौसेना के लिए ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ने वाले उच्च ऊंचाई वाले लंबी दूरी के (HALE) ड्रोन को लीज़ पर लेने को भी स्वीकृति दे दी गई है। ये ड्रोन भारतीय नौसेना को हिंद महासागर के विशाल क्षेत्र में चौकसी और निगरानी में सहायता करेंगे। इसके अलावा नौसेना के लिए शक्तिशाली टग, हाई फ्रिक्वेंसी रेडियो भी खरीदे जाएंगे।
भारतीय वायुसेना के लिए स्वचालित टेकऑफ-लैडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम खरीदा जाएगा जिससे एयरबेसों की सुरक्षा को बल मिलेगा। हवा से हवा में मार करने वाली स्वदेशी मिसाइल अस्त्र मार्क-2 की भी खरीद की जाएगी।
अस्त्र मार्क-2 की रेंज 200 किमी तक है और इसे सुखोई-30 के अलावा स्वदेशी जेट तेजस में भी लगाया जा सकता है। अस्त्र मार्क-1 को पहले ही सफलता पूर्वक सुखोई-30 और तेजस में लगाया जा चुका है। नई और आधुनिक अस्त्र मार्क-2 भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में वृद्धि करेगी।
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