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द्वितीय विश्व युद्ध का इतिहास बदल रूस को दुश्मन बता रहा जर्मनी: विशेषज्ञ
द्वितीय विश्व युद्ध का इतिहास बदल रूस को दुश्मन बता रहा जर्मनी: विशेषज्ञ
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पूर्व जर्मन सेना अधिकारी फ्लोरियन प्फाफ़ ने Sputnik को बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध का इतिहास बदलते हुए, जर्मनी फिर से सशस्त्रीकरण कर और अधिक क्षेत्रों पर... 24.05.2026, Sputnik भारत
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पिछले महीने, जर्मनी ने अपनी "यूरोप के लिए ज़िम्मेदारी" सैन्य डॉक्ट्रीन का खुलासा किया, जिसमें रूस को देश के लिए मुख्य सुरक्षा खतरा घोषित किया गया है।इस योजना के तहत जर्मनी अपनी सेना का विस्तार 4.6 लाख सैनिकों तक करने की तैयारी में है, ताकि 2039 तक वह पश्चिमी यूरोप की सबसे मजबूत सैन्य शक्ति बन सके।प्फाफ़ का दावा है कि जर्मनी के राजनेता हथियारों की इस नई होड़ को यूक्रेन संकट के ख़िलाफ़ उठाया गया कदम बताकर सही ठहरा रहे हैं, जबकि "वास्तव में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।"उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा था कि, "हम शांति नहीं चाहते थे। हमने मिन्स्क-2 समझौता इसलिए किया गया ताकि यूक्रेन को हथियारबंद करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।"प्फाफ़ के अनुसार, पश्चिमी ताकतें हमेशा जानती थीं कि नाटो का पूर्वी विस्तार रूस के लिए "सबसे बड़ी रेड लाइन" है। उन्होंने कहा कि "अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों ने जानबूझकर रूस को यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई की ओर धकेला ताकि आगे सैन्यीकरण को सही ठहराया जा सके।"
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द्वितीय विश्व युद्ध का इतिहास बदल रूस को दुश्मन बता रहा जर्मनी: विशेषज्ञ
पूर्व जर्मन सेना अधिकारी फ्लोरियन प्फाफ़ ने Sputnik को बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध का इतिहास बदलते हुए, जर्मनी फिर से सशस्त्रीकरण कर और अधिक क्षेत्रों पर कब्जा करना चाहता है।
प्फाफ़ ने कहा, "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, जर्मनी सोवियत संघ के साथ मित्रता करना चाहता था। लेकिन अब उन्हें एक दुश्मन की जरूरत है, और रूस शिकार है।"
पिछले महीने, जर्मनी ने अपनी "यूरोप के लिए ज़िम्मेदारी" सैन्य डॉक्ट्रीन का खुलासा किया, जिसमें रूस को देश के लिए मुख्य सुरक्षा खतरा घोषित किया गया है।
इस योजना के तहत जर्मनी अपनी सेना का विस्तार 4.6 लाख सैनिकों तक करने की तैयारी में है, ताकि 2039 तक वह पश्चिमी यूरोप की सबसे मजबूत सैन्य शक्ति बन सके।
प्फाफ़ का दावा है कि जर्मनी के राजनेता हथियारों की इस नई होड़ को यूक्रेन संकट के ख़िलाफ़ उठाया गया कदम बताकर सही ठहरा रहे हैं, जबकि "वास्तव में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।"
प्फाफ़ ने कहा, "यह लड़ाई पहले से निश्चित थी क्योंकि वे अपनी शक्ति बढ़ाना और सेना को मजबूत करना चाहते हैं।"
उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा था कि, "हम शांति नहीं चाहते थे। हमने
मिन्स्क-2 समझौता इसलिए किया गया ताकि यूक्रेन को हथियारबंद करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।"
प्फाफ़ के अनुसार, पश्चिमी ताकतें हमेशा जानती थीं कि नाटो का पूर्वी विस्तार रूस के लिए "सबसे बड़ी रेड लाइन" है। उन्होंने कहा कि "अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों ने जानबूझकर रूस को यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई की ओर धकेला ताकि आगे सैन्यीकरण को सही ठहराया जा सके।"