https://hindi.sputniknews.in/20260526/bhaarit-kii-drion-yuddh-kii-taiyaariii-tej-do-ne-sistm-bnenge-10988020.html
भारत की ड्रोन युद्ध की तैयारी तेज़, दो नए सिस्टम बनेंगे
भारत की ड्रोन युद्ध की तैयारी तेज़, दो नए सिस्टम बनेंगे
Sputnik भारत
इस समय युद्धों में हमले के लिए ड्रोन सबसे खतरनाक और असरदार हथियारों में से एक बनकर उभरे हैं। भारत अपने अहम सैन्य ठिकानों को ड्रोन हमलों से सुरक्षित रखने के लिए... 26.05.2026, Sputnik भारत
2026-05-26T19:32+0530
2026-05-26T19:32+0530
2026-05-26T19:32+0530
डिफेंस
भारत
आत्मनिर्भर भारत
भारतीय सेना
भारतीय सशस्त्र सेनाएँ
भारतीय वायुसेना
भारतीय नौसेना
ड्रोन
ड्रोन हमला
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e7/09/04/4020498_0:84:1600:984_1920x0_80_0_0_9e7bd0036239e0bc7056fecf516ad409.jpg
इनमें से एक केबल से जुड़ा टेथर्ड ड्रोन होगा, जबकि दूसरा नेटवर्क आधारित एयर माइन काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम होगा। यह सिस्टम हवा में होने वाले बदलावों को भांपकर हमलावर ड्रोन झुंड यानी स्वार्म ड्रोन का पता लगाएगा और उसकी सूचना देगा।रक्षा उद्योग के सूत्रों से Sputnik को मिली जानकारी के अनुसार, दोनों ड्रोन-रोधी सिस्टम स्वदेशी रक्षा उद्योग द्वारा बनाए जा रहे हैं। इन प्रयासों को भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के ठिकानों को ड्रोन हमलों से मजबूत सुरक्षा देने के लिए तेज़ किया गया है।टेथर्ड ड्रोन अहम सैन्य ठिकानों, सैन्य उपकरणों और आगे बढ़ रही सैन्य टुकड़ियों को भी सुरक्षा प्रदान करेगा। यह सिस्टम केवल एक ड्रोन और उसके कंट्रोल स्टेशन पर आधारित होगा, जिससे उसे ज्यादा गतिशील बनाया जा सके।दुश्मन के ड्रोन हमले की पूर्व सूचना के लिए एयर माइन काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम भी बनाया जा रहा है। इस सिस्टम में कई सेंसरों का नेटवर्क होगा, जो हवा में ड्रोन की उड़ान से होने वाले बदलावों को भांपकर दिन-रात लगातार किसी भी ड्रोन हमले की सूचना देंगे और उसका पीछा करेंगे।इस सिस्टम का कंट्रोल सेंटर एक लैपटॉप होगा, जो सभी सेंसरों से मिले डेटा का आकलन करेगा और हमले से जुड़ी जानकारी संकलित करेगा। हर सेंसर 2,000 मीटर तक की ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन या स्वार्म ड्रोन की सटीक जानकारी कंट्रोल सेंटर को तुरंत और लगातार भेजता रहेगा।
https://hindi.sputniknews.in/20260518/viytnaam-ko-brhmos-niriyaat-kii-sviikti-agle-maah-lgbhg-2900-kriod-riupe-kaa-hogaa-kul-saudaa-suutr-10936806.html
भारत
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
2026
कृष्णमोहन मिश्रा
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e8/05/14/7409018_0:0:486:485_100x100_80_0_0_7e79ffa0ba84a7bd46685bfea1e9d1aa.jpg
कृष्णमोहन मिश्रा
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e8/05/14/7409018_0:0:486:485_100x100_80_0_0_7e79ffa0ba84a7bd46685bfea1e9d1aa.jpg
खबरें
hi_IN
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e7/09/04/4020498_89:0:1512:1067_1920x0_80_0_0_d60ed150fbe85a46f4ef81be2f8e8a53.jpgSputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
कृष्णमोहन मिश्रा
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e8/05/14/7409018_0:0:486:485_100x100_80_0_0_7e79ffa0ba84a7bd46685bfea1e9d1aa.jpg
भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारतीय सेना, भारतीय सशस्त्र सेनाएँ, भारतीय वायुसेना, भारतीय नौसेना, ड्रोन, ड्रोन हमला
भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारतीय सेना, भारतीय सशस्त्र सेनाएँ, भारतीय वायुसेना, भारतीय नौसेना, ड्रोन, ड्रोन हमला
भारत की ड्रोन युद्ध की तैयारी तेज़, दो नए सिस्टम बनेंगे
इस समय युद्धों में हमले के लिए ड्रोन सबसे खतरनाक और असरदार हथियारों में से एक बनकर उभरे हैं। भारत अपने अहम सैन्य ठिकानों को ड्रोन हमलों से सुरक्षित रखने के लिए दो नए सिस्टम बना रहा है।
इनमें से एक केबल से जुड़ा टेथर्ड ड्रोन होगा, जबकि दूसरा नेटवर्क आधारित एयर माइन काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम होगा। यह सिस्टम हवा में होने वाले बदलावों को भांपकर हमलावर ड्रोन झुंड यानी स्वार्म ड्रोन का पता लगाएगा और उसकी सूचना देगा।
रक्षा उद्योग के सूत्रों से Sputnik को मिली जानकारी के अनुसार, दोनों
ड्रोन-रोधी सिस्टम स्वदेशी रक्षा उद्योग द्वारा बनाए जा रहे हैं। इन प्रयासों को भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के ठिकानों को ड्रोन हमलों से मजबूत सुरक्षा देने के लिए तेज़ किया गया है।
टेथर्ड ड्रोन अहम सैन्य ठिकानों, सैन्य उपकरणों और आगे बढ़ रही सैन्य टुकड़ियों को भी सुरक्षा प्रदान करेगा। यह सिस्टम केवल एक ड्रोन और उसके कंट्रोल स्टेशन पर आधारित होगा, जिससे उसे ज्यादा गतिशील बनाया जा सके।
इस ड्रोन का सेंसर दिन-रात लगातार वीडियो भेजेगा, जिससे आसपास के क्षेत्र पर नज़र रखी जा सकेगी। यह ड्रोन 1,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर उड़कर 10 किमी के क्षेत्र की निगरानी कर सकेगा। यह केबल से जुड़े रहकर 24 घंटे तक और केबल से अलग होकर 40-45 मिनट तक काम कर सकता है।
दुश्मन के ड्रोन हमले की पूर्व सूचना के लिए एयर माइन काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम भी बनाया जा रहा है। इस सिस्टम में कई सेंसरों का नेटवर्क होगा, जो हवा में ड्रोन की उड़ान से होने वाले बदलावों को भांपकर दिन-रात लगातार किसी भी ड्रोन हमले की सूचना देंगे और उसका पीछा करेंगे।
इस सिस्टम का कंट्रोल सेंटर एक लैपटॉप होगा, जो सभी सेंसरों से मिले डेटा का आकलन करेगा और हमले से जुड़ी जानकारी संकलित करेगा। हर सेंसर 2,000 मीटर तक की ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन या स्वार्म ड्रोन की सटीक जानकारी कंट्रोल सेंटर को तुरंत और लगातार भेजता रहेगा।