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भारत में सुखोई-30 के इंजन की सारसंभाल के लिए क्रांतिकारी परियोजना आने वाली है
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भारतीय वायुसेना अपने सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से ऐसा डिजिटल आभासी मॉडल बनाएगी जो किसी जेट के इंजन में आने वाली किसी समस्या... 02.06.2026, Sputnik भारत
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Sputnik भारत को भारतीय वायुसेना के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वायुसेना ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई के साथ तीन समझौते किए हैं जिनसे हर सुखोई-30 जेट का डिजिटल आभासी जुड़वां (AI digital twins) बनाया जाएगा। इस तकनीक को अपनाने के बाद, विमानों को जमीन पर बहुत कम समय बिताना होगा और वे बेहद कम समय में अगली उड़ान के लिए तैयार हो जाएंगे। इससे धन की बचत होने के अतिरिक्त और अधिक विमान प्रशिक्षण या किसी अभियान के लिए उपलब्ध रहेंगे।सुखोई-30 का भारतीय वायुसेना में शामिल होना लगभग दो दशक पहले प्रारंभ हुआ था और इनमें से ज्यादातर विमान आधी उम्र में होने वाली विस्तृत मरम्मत की प्रतीक्षा में हैं। इसलिए वायुसेना ने सबसे पहले सुखोई-30 के लिए इस अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोग का निर्णय लिया है। हालांकि भविष्य में हेलीकॉप्टर सहित कई दूसरे उपकरणों के लिए भी इस तकनीक को अपनाने की योजना है।
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भारत, आत्मनिर्भर भारत, रूस , भारतीय वायुसेना, सुखोई-30mki , हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (hal)
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भारत में सुखोई-30 के इंजन की सारसंभाल के लिए क्रांतिकारी परियोजना आने वाली है
भारतीय वायुसेना अपने सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से ऐसा डिजिटल आभासी मॉडल बनाएगी जो किसी जेट के इंजन में आने वाली किसी समस्या को पहले से ही भांप लेगा ताकि उसे ठीक किया जा सके। इस क्रांतिकारी कदम से वायुसेना के इस मुख्य युद्धक विमान की मरम्मत में कम समय लगेगा और उसका प्रयोग अधिक समय तक किया जा सकेगा।
Sputnik भारत को भारतीय वायुसेना के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वायुसेना ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई के साथ तीन समझौते किए हैं जिनसे हर सुखोई-30 जेट का डिजिटल आभासी जुड़वां (AI digital twins) बनाया जाएगा।
यह एआई डिजिटल जुड़वां हर जेट के स्वास्थ्य का एक आभासी एक्सरे होगा जिससे पता लग जाएगा कि भविष्य में इस इंजन में क्या समस्या आ सकती है। इस मॉडल की सहायता से समस्या पैदा होने से पहले ही उसका पता लगेगा जिससे समय रहते समस्या का निदान किया जा सकेगा।
इस तकनीक को अपनाने के बाद, विमानों को जमीन पर बहुत कम समय बिताना होगा और वे बेहद कम समय में अगली उड़ान के लिए तैयार हो जाएंगे। इससे धन की बचत होने के अतिरिक्त और अधिक विमान प्रशिक्षण या किसी अभियान के लिए उपलब्ध रहेंगे।
भारतीय वायुसेना में इस समय सबसे ज्यादा संख्या रूसी मूल के सुखोई-30 लड़ाकू विमानों की है। लगभग 259 सुखोई विमान इस समय भारतीय वायुसेना में हैं और अन्य 12 सुखोई निर्माणाधीन हैं। भारत और रूस के बीच 272 सुखोई-30 खरीदने का समझौता हुआ था जिनमें से 50 रूस से खरीदे गए और शेष 222 का उत्पादन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में हुआ है।
सुखोई-30 का भारतीय वायुसेना में शामिल होना लगभग दो दशक पहले प्रारंभ हुआ था और इनमें से ज्यादातर विमान आधी उम्र में होने वाली विस्तृत मरम्मत की प्रतीक्षा में हैं। इसलिए वायुसेना ने सबसे पहले सुखोई-30 के लिए इस अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोग का निर्णय लिया है। हालांकि भविष्य में हेलीकॉप्टर सहित कई दूसरे उपकरणों के लिए भी इस तकनीक को अपनाने की योजना है।