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ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भरता की ओर कदम: अब खुद डिज़ाइन और निर्माण करेगी वायुसेना
ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भरता की ओर कदम: अब खुद डिज़ाइन और निर्माण करेगी वायुसेना
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ड्रोन युद्धकला के बढ़ते महत्व को देखते हुए अब भारतीय वायुसेना ड्रोन डिज़ाइन, निर्माण और मरम्मत की अपनी क्षमता विकसित करने की तैयारी में है। रक्षा सूत्रों से... 18.06.2026, Sputnik भारत
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रक्षा उद्योग से जुड़े सूत्रों ने Sputnik को बताया है कि वायुसेना निजी रक्षा कंपनियों से आत्मघाती और दोबारा प्रयोग में लिए जा सकने वाले दोनों ही तरह के ड्रोन निर्माण में सहयोग चाहती है। भारत सरकार ने रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने का लक्ष्य रखा है जिससे अस्त्र-शस्त्रों के आयात पर निर्भरता समाप्त की जा सके। रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सेनाएं भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रयास कर रही हैं। पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के बाद ड्रोन युद्धकला का महत्व सिद्ध हो चुका है। इसलिए भारतीय वायुसेना अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ड्रोन के निर्माण के लिए एक पूरी अवसंरचना विकसित कर रही है। इससे पहले भारतीय सेना ने भी अपनी आवश्यकता के अनुसार ड्रोन और अन्य अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण के लिए कई कदम उठाए हैं जिसमें निजी रक्षा उद्योगों को भी इस मुहिम में जोड़ना शामिल है।
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भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय (mod), भारतीय वायुसेना, भारतीय सेना, ड्रोन, कामिकेज़ ड्रोन, पाकिस्तान, तमिलनाडु
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ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भरता की ओर कदम: अब खुद डिज़ाइन और निर्माण करेगी वायुसेना
ड्रोन युद्धकला के बढ़ते महत्व को देखते हुए अब भारतीय वायुसेना ड्रोन डिज़ाइन, निर्माण और मरम्मत की अपनी क्षमता विकसित करने की तैयारी में है। रक्षा सूत्रों से Sputnik को मिली जानकारी के अनुसार तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस में वायुसेना निजी रक्षा उद्योग की सहायता से अपनी सामरिक आवश्यकता के अनुरूप ड्रोन बनाएगी।
रक्षा उद्योग से जुड़े सूत्रों ने Sputnik को बताया है कि वायुसेना निजी रक्षा कंपनियों से आत्मघाती और दोबारा प्रयोग में लिए जा सकने वाले दोनों ही तरह के ड्रोन निर्माण में सहयोग चाहती है।
निजी कंपनी को अनुबंध होने के 9 महीने के अंदर दो प्रोटोटाइप ड्रोन बनाने होंगे। निजी कंपनी को वायुसेना के कर्मचारियों को ड्रोन की मरम्मत और संचालन का प्रशिक्षण भी देना होगा। ये ड्रोन हल्के और मध्यम भार के होंगे, उनको सुरक्षित रूप से संचालित किया जा सकेगा और मुहिम के अनुसार अलग-अलग प्रकार के विस्फोटक ले जाने में सक्षम होंगे।
भारत सरकार ने रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने का लक्ष्य रखा है जिससे अस्त्र-शस्त्रों के आयात पर निर्भरता समाप्त की जा सके। रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सेनाएं भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रयास कर रही हैं।
पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के बाद ड्रोन युद्धकला का महत्व सिद्ध हो चुका है। इसलिए
भारतीय वायुसेना अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ड्रोन के निर्माण के लिए एक पूरी अवसंरचना विकसित कर रही है।
इससे पहले भारतीय सेना ने भी अपनी आवश्यकता के अनुसार ड्रोन और अन्य अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण के लिए कई कदम उठाए हैं जिसमें निजी रक्षा उद्योगों को भी इस मुहिम में जोड़ना शामिल है।