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रडार को चकमा देने में सक्षम, निर्देशित मिसाइल से लैस युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' भारतीय नौसेना में शामिल
रडार को चकमा देने में सक्षम, निर्देशित मिसाइल से लैस युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' भारतीय नौसेना में शामिल
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नीलगिरि श्रेणी का छठवां स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट महेंद्रगिरि शनिवार को विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हो गया है। इस युद्धपोत को नौसेना... 11.07.2026, Sputnik भारत
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आईएनएस महेंद्रगिरि लगभग 6500 टन वज़नी और 149 मीटर लंबा पोत है जिसमें 226 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं। इसका मुख्य अस्त्र 8 ब्रह्मोस मिसाइलें है जिनसे शत्रु के पोतों या ज़मीनी ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। भारतीय नौसेना में ऐसे युद्धपोतों की कुल संख्या 20 हो गई है। लगभग सभी लंबी दूरी की ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस हैं। इनमें से रूस में बने तलवार श्रेणी के 8 युद्धपोतों के अतिरिक्त सभी का निर्माण भारत में ही हुआ है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में फैले 23 लाख वर्ग किलोमीटर के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन में भारत के आर्थिक हितों की सुरक्षा में इन युद्धपोतों का महत्वपूर्ण स्थान है। इसके अतिरिक्त ये शक्तिशाली और तीव्रगति से चलने वाले युद्धपोत समुद्री डकैती, तस्करी और आतंकवाद से मुक़ाबले के लिए भी तैनात रहते हैं। नीलगिरि श्रेणी का सातवां और अंतिम युद्धपोत विंध्यागिरि इसी वर्ष नौसेना में शामिल हो जाएगा। गोवा शिपयार्ड में बन रहा तलवार श्रेणी का नौंवा फ्रिगेट त्रिपुट इसी वर्ष और दसवां फ्रिगेट तवस्या अगले वर्ष नौसेना में शामिल हो जाएगा।
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भारत, आत्मनिर्भर भारत, रूस , भारतीय नौसेना, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, फ्रिगेट विंध्यगिरि, ब्रह्मोस , समुद्री लुटेरे, आतंकवाद
भारत, आत्मनिर्भर भारत, रूस , भारतीय नौसेना, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, फ्रिगेट विंध्यगिरि, ब्रह्मोस , समुद्री लुटेरे, आतंकवाद
रडार को चकमा देने में सक्षम, निर्देशित मिसाइल से लैस युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' भारतीय नौसेना में शामिल
नीलगिरि श्रेणी का छठवां स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट महेंद्रगिरि शनिवार को विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हो गया है। इस युद्धपोत को नौसेना के युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो के डिज़ाइन के आधार पर मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लि. ने बनाया है और इसमें 75 प्रतिशत स्वदेशी कल-पुर्ज़े लगाए गए हैं।
आईएनएस महेंद्रगिरि लगभग 6500 टन वज़नी और 149 मीटर लंबा पोत है जिसमें 226 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं। इसका मुख्य अस्त्र 8 ब्रह्मोस मिसाइलें है जिनसे शत्रु के पोतों या ज़मीनी ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
साथ ही सबमरीन आक्रमण से बचाव के लिए इसमें टारपीडो और रॉकेट लगे हैं। इसमें अत्याधुनिक रडार, सोनार और इलेक्ट्रॉनिक वारफ़ेयर सूट लगे हैं। यह समुद्र की सतह, समुद्र के अंदर से या हवा से किए गए किसी भी आक्रमण का सामना कर सकता है। इसका विशेष डिज़ाइन इसे रडार पर ढूंढ़ना कठिन बनाता है और इसमें अधिकतर प्रणालियां स्वचालित हैं।
भारतीय नौसेना में ऐसे युद्धपोतों की कुल संख्या 20 हो गई है। लगभग सभी लंबी दूरी की
ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस हैं। इनमें से रूस में बने तलवार श्रेणी के 8 युद्धपोतों के अतिरिक्त सभी का निर्माण भारत में ही हुआ है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में फैले 23 लाख वर्ग किलोमीटर के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन में भारत के आर्थिक हितों की सुरक्षा में इन युद्धपोतों का महत्वपूर्ण स्थान है। इसके अतिरिक्त ये शक्तिशाली और तीव्रगति से चलने वाले युद्धपोत समुद्री डकैती, तस्करी और आतंकवाद से मुक़ाबले के लिए भी तैनात रहते हैं।
नीलगिरि श्रेणी का सातवां और अंतिम युद्धपोत विंध्यागिरि इसी वर्ष नौसेना में शामिल हो जाएगा। गोवा शिपयार्ड में बन रहा तलवार श्रेणी का नौंवा फ्रिगेट त्रिपुट इसी वर्ष और दसवां फ्रिगेट तवस्या अगले वर्ष नौसेना में शामिल हो जाएगा।