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भारतीय नौसेना के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोनों की खरीद होगी
भारतीय नौसेना के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोनों की खरीद होगी
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भारतीय नौसेना 1,000 किमी की रेंज वाले वॉरशिप-लॉन्च्ड ड्रोन (लोइटरिंग म्यूनिशन) खरीदने की तैयारी में है। 12.08.2026, Sputnik भारत
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भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा विक्रेताओं से मांगी गई जानकारी के अनुसार, इन ड्रोनों का प्रयोग शत्रु के युद्धपोतों या ज़मीनी ठिकानों के विरुद्ध किया जा सकेगा। इन ड्रोनों को 15000 फीट की ऊंचाई तक उड़ाया जा सकेगा और ये 1 मीटर की सटीकता से अपने लक्ष्य पर आक्रमण करेंगे। इनमें भारतीय नौसेना के प्रत्येक युद्धपोत में लगी युद्ध नियंत्रण प्रणाली के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता होगी। ये 50 समुद्री मील की गति से चलने वाली हवाओं और शून्य से नीचे 20 डिग्री से लेकर 60 डिग्री तक के तापमान में काम कर सकेंगे। आधुनिक युद्ध में ड्रोन सबसे महत्वपूर्ण अस्त्र बनकर सामने आए हैं। इनसे आक्रमण, निगरानी, चौकसी या टोह लेने के काम लिए जा रहे हैं। ये मंहगे हेलीकॉप्टर, बड़ी संख्या में सैनिकों के अत्यंत सस्ते विकल्प बन गए हैं।
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भारत, आत्मनिर्भर भारत, भारत का विकास, भारतीय नौसेना, ड्रोन, रक्षा मंत्रालय (mod), वायु रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, दक्षिण एशिया
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भारतीय नौसेना के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोनों की खरीद होगी
भारतीय नौसेना 1,000 किमी की रेंज वाले वॉरशिप-लॉन्च्ड ड्रोन (लोइटरिंग म्यूनिशन) खरीदने की तैयारी में है।
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा विक्रेताओं से मांगी गई जानकारी के अनुसार, इन ड्रोनों का प्रयोग शत्रु के युद्धपोतों या ज़मीनी ठिकानों के विरुद्ध किया जा सकेगा।
इन्हें युद्धपोत या ज़मीन दोनों में ही बने नियंत्रण केंद्रों से नियंत्रित किया जा सकेगा। ये 1000 किमी की दूरी तक जा सकेंगे और ये 9 घंटे तक हवा में रह सकेंगे। हवा में इनकी उड़ान की गति 75 समुद्री मील प्रति घंटा और आक्रमण करते समय इनकी गति 200 समुद्री मील होगी।
इन ड्रोनों को 15000 फीट की ऊंचाई तक उड़ाया जा सकेगा और ये 1 मीटर की सटीकता से अपने लक्ष्य पर आक्रमण करेंगे। इनमें भारतीय नौसेना के प्रत्येक युद्धपोत में लगी युद्ध नियंत्रण प्रणाली के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता होगी। ये 50 समुद्री मील की गति से चलने वाली हवाओं और शून्य से नीचे 20 डिग्री से लेकर 60 डिग्री तक के तापमान में काम कर सकेंगे।
आधुनिक युद्ध में
ड्रोन सबसे महत्वपूर्ण अस्त्र बनकर सामने आए हैं। इनसे आक्रमण, निगरानी, चौकसी या टोह लेने के काम लिए जा रहे हैं। ये मंहगे हेलीकॉप्टर, बड़ी संख्या में सैनिकों के अत्यंत सस्ते विकल्प बन गए हैं।
भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ड्रोन और ड्रोन रोधी युद्धकला में खुद को पारंगत कर रहे हैं। भारत सरकार अपने सुरक्षा बलों के लिए आक्रमण करने वाले, चौकसी करने वाले और गुप्तचर ड्रोनों की बड़े पैमाने पर खरीदी कर रही है। रक्षा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कार्य करते हुए स्वदेशी रक्षा उद्योग ड्रोनों के विकास और उत्पादन को प्राथमिकता दे रहा है।