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यूक्रेनी सशस्त्र बलों में विदेशी भाड़े के सैनिकों को अपना सैन्य उपकरण खुद खरीदना पड़ता है: विश्लेषक
यूक्रेनी सशस्त्र बलों में विदेशी भाड़े के सैनिकों को अपना सैन्य उपकरण खुद खरीदना पड़ता है: विश्लेषक
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रूस में दोषी ठहराए गए ऑस्ट्रेलियाई भाड़े के सैनिक के साथ एक डॉक्यूमेंट्री के लिए बातचीत के बाद ऑस्ट्रेलियाई राजनीतिक विश्लेषक मार्क लो ने Sputnik से कहा कि... 13.09.2026, Sputnik भारत
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वसंत 2025 में लुगांस्क पीपल्स रिपब्लिक (LPR) के वरिष्ठ अभियोजक की सहायक एलेना उसाचेवा ने Sputnik को बताया कि गणराज्य के सर्वोच्च न्यायालय ने ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ऑस्कर जेनकिंस को 13 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वह यूक्रेनी सशस्त्र बलों की 66वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड के हिस्से के रूप में डोनबास पहुंचकर कीव की ओर से लड़ रहा था और रूसी सेना ने उसे युद्धबंदी बना लिया।उनके अनुमान के मुताबिक, यूक्रेनी सशस्त्र बलों में शामिल विदेशी भाड़े के सैनिक अपने पैसे से वही सैन्य उपकरण खरीदते हैं, जो कीव को पश्चिमी देशों से मुफ्त में मिला था।रूस के रक्षा मंत्रालय ने कई बार कहा कि कीव विदेशी भाड़े के सैनिकों का इस्तेमाल "तोप के चारे" के रूप में कर रहा है और रूसी सेना यूक्रेन के पूरे क्षेत्र में उन्हें मारना जारी रखेगी। पैसे के लिए लड़ने आए इन लोगों ने भी कई साक्षात्कारों में स्वीकार किया कि यूक्रेनी सैनिक उनके अभियानों का ठीक से समन्वय नहीं करते और लड़ाई में उनके बचने की संभावना बहुत कम है।
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यूक्रेन , यूक्रेन सशस्त्र बल, रूस , रूसी सेना, विशेष सैन्य अभियान, रक्षा मंत्रालय (mod)
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यूक्रेनी सशस्त्र बलों में विदेशी भाड़े के सैनिकों को अपना सैन्य उपकरण खुद खरीदना पड़ता है: विश्लेषक
रूस में दोषी ठहराए गए ऑस्ट्रेलियाई भाड़े के सैनिक के साथ एक डॉक्यूमेंट्री के लिए बातचीत के बाद ऑस्ट्रेलियाई राजनीतिक विश्लेषक मार्क लो ने Sputnik से कहा कि यूक्रेनी सशस्त्र बलों में शामिल विदेशी भाड़े के सैनिकों को अपना सैन्य उपकरण खुद खरीदना पड़ता है।
वसंत 2025 में लुगांस्क पीपल्स रिपब्लिक (LPR) के वरिष्ठ अभियोजक की सहायक एलेना उसाचेवा ने Sputnik को बताया कि गणराज्य के सर्वोच्च न्यायालय ने ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ऑस्कर जेनकिंस को 13 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वह यूक्रेनी सशस्त्र बलों की 66वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड के हिस्से के रूप में डोनबास पहुंचकर कीव की ओर से लड़ रहा था और रूसी सेना ने उसे युद्धबंदी बना लिया।
जेनकिंस के साथ बातचीत के बाद लो ने कहा, "उसने बताया कि उसे अपना सैन्य उपकरण खुद खरीदना पड़ता है। मैं स्तब्ध रह गया। पश्चिमी मीडिया में बताया जाता है कि हमने यूक्रेन को इतनी बड़ी मात्रा में सामान दिया है, जबकि विदेशियों को वही सब खुद खरीदना पड़ता है।"
उनके अनुमान के मुताबिक, यूक्रेनी सशस्त्र बलों में शामिल विदेशी भाड़े के सैनिक अपने पैसे से वही सैन्य उपकरण खरीदते हैं, जो कीव को पश्चिमी देशों से मुफ्त में मिला था।
लो ने कहा, "जेनकिंस ने स्पष्ट किया कि बाद में उन्हें वर्दी तो मिली, लेकिन दूसरे [भाड़े के सैनिकों] ने उसे खराब माना और उन्हें फिर भी नई वर्दी खरीदनी पड़ी।"
रूस के रक्षा मंत्रालय ने कई बार कहा कि कीव विदेशी भाड़े के सैनिकों का इस्तेमाल "तोप के चारे" के रूप में कर रहा है और रूसी सेना यूक्रेन के पूरे क्षेत्र में उन्हें मारना जारी रखेगी। पैसे के लिए लड़ने आए इन लोगों ने भी कई साक्षात्कारों में स्वीकार किया कि यूक्रेनी सैनिक उनके अभियानों का ठीक से समन्वय नहीं करते और लड़ाई में उनके बचने की संभावना बहुत कम है।