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भारत-रूस नौसैनिक अभ्यास पूर्ण, सह्याद्रि स्वदेश रवाना
भारत-रूस नौसैनिक अभ्यास पूर्ण, सह्याद्रि स्वदेश रवाना
Sputnik भारत
आईएनएस सह्याद्रि भारतीय और रूसी साझा नौसैनिक अभ्यास इंद्रा-2026 में सफल भागीदारी के पश्चात रूस के व्लादिवोस्तोक बंदरगाह से 20 अक्टूबर को रवाना हो गया है।... 23.10.2026, Sputnik भारत
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यह अभ्यास बंदरगाह और समुद्र दो चरणों में हुआ। बंदरगाह के चरण में प्रमुख नेतृत्व के बीच संपर्क, एक-दूसरे के पोतों का भ्रमण, विशेषज्ञों के बीच विमर्श, कार्रवाई में तालमेल बढ़ाने की गतिविधियों के अतिरिक्त खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इन गतिविधियों से दोनों नौसेनाओं के कर्मचारियों के बीच व्यावसायिक चर्चाओं, विचार-विमर्श और कार्रवाई करने के तरीक़े को समझने का अवसर मिला। साझा नौसैनिक अभ्यास इन्द्रा की शुरुआत 2003 से हुई थी। इस अभ्यास के उद्देश्य समुद्री डकैतियों, नशे की तस्करी और आतंकवाद के विरुद्ध साझा नौसैनिक कार्रवाई की क्षमता को विकसित करना है। इस अभ्यास में विभिन्न अस्त्रों से फायरिंग के अतिरिक्त अन्य नौसैनिक युद्धकलाओं को परखा जाता है। इस अभ्यास में शामिल आईएनएस सह्याद्रि भारतीय नौसेना के मुख्य युद्धपोतों में से एक शिवालिक श्रेणी का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। आईएनएस सह्याद्रि का मुख्य अस्त्र भारत और रूस के सहयोग से बनी लंबी दूरी तक प्रहार करने वाली 8 ब्रह्मोस मिसाइलें हैं। इनके अतिरिक्त इसमें हवाई आक्रमण से निपटने के लिए श्टिल और बराक मिसाइलें भी लगाई गई हैं। 6200 टन भारी इस युद्धपोत में 257 नौसैनिक तैनात होकर 32 समुद्री मील प्रति घंटे की गति से समुद्र में यात्रा कर सकते हैं।
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भारत, रूस , भारतीय नौसेना, व्लादिवोस्तोक, ब्रह्मोस , रूसी नौसेना, युद्धपोत, आतंकवाद , समुद्री लुटेरे
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भारत-रूस नौसैनिक अभ्यास पूर्ण, सह्याद्रि स्वदेश रवाना
आईएनएस सह्याद्रि भारतीय और रूसी साझा नौसैनिक अभ्यास इंद्रा-2026 में सफल भागीदारी के पश्चात रूस के व्लादिवोस्तोक बंदरगाह से 20 अक्टूबर को रवाना हो गया है। नौसेना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार नौसेनाओं के इस अभ्यास से दोनों देशों के बीच रक्षा और नौवहन साझेदारी को नया बल मिला है।
यह अभ्यास बंदरगाह और समुद्र दो चरणों में हुआ। बंदरगाह के चरण में प्रमुख नेतृत्व के बीच संपर्क, एक-दूसरे के पोतों का भ्रमण, विशेषज्ञों के बीच विमर्श, कार्रवाई में तालमेल बढ़ाने की गतिविधियों के अतिरिक्त खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इन गतिविधियों से दोनों नौसेनाओं के कर्मचारियों के बीच व्यावसायिक चर्चाओं, विचार-विमर्श और कार्रवाई करने के तरीक़े को समझने का अवसर मिला।
इसके बाद हुए समुद्र चरण में सामंजस्यपूर्ण पैंतरेबाज़ी, सम्मिलित संचार, हेलीकॉप्टर की कार्रवाइयां और घायलों को निकालने के अभ्यास हुए। इससे नौसैनिकों को समुद्र में साथ मिलकर काम करने, आपसी संपर्क बढ़ाने और साथ मिलकर कार्रवाई करने की क्षमता को बढ़ाने का मौका मिला। इस अभ्यास से दोनों देशों के बीच लंबे सैनिक संबंधों को दृढ़ता मिली साथ ही दोनों देशों की सुरक्षित, स्थायी और शांतिपूर्ण समुद्री वातावरण के लिए प्रतिबद्धता भी प्रकट हुई।
साझा नौसैनिक अभ्यास इन्द्रा की शुरुआत 2003 से हुई थी। इस अभ्यास के उद्देश्य समुद्री डकैतियों, नशे की तस्करी और आतंकवाद के विरुद्ध साझा नौसैनिक कार्रवाई की क्षमता को विकसित करना है। इस अभ्यास में विभिन्न अस्त्रों से फायरिंग के अतिरिक्त अन्य नौसैनिक युद्धकलाओं को परखा जाता है।
इस अभ्यास में शामिल आईएनएस सह्याद्रि
भारतीय नौसेना के मुख्य युद्धपोतों में से एक शिवालिक श्रेणी का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। आईएनएस सह्याद्रि का मुख्य अस्त्र भारत और रूस के सहयोग से बनी लंबी दूरी तक प्रहार करने वाली 8 ब्रह्मोस मिसाइलें हैं। इनके अतिरिक्त इसमें हवाई आक्रमण से निपटने के लिए श्टिल और बराक मिसाइलें भी लगाई गई हैं। 6200 टन भारी इस युद्धपोत में 257 नौसैनिक तैनात होकर 32 समुद्री मील प्रति घंटे की गति से समुद्र में यात्रा कर सकते हैं।