द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने बताया, "पहली बार, सरकारी माल ले जाने वाला पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉरपोरेशन (PNSC) का जहाज बांग्लादेशी बंदरगाह पर डॉक करेगा, जो समुद्री व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।"
पूर्व राजनयिक जे.के. त्रिपाठी ने कहा, "भारत को बांग्लादेश के साथ भी ऐसा ही दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। हम जानते हैं कि बांग्लादेश वर्तमान में पाकिस्तान के साथ गठबंधन कर रहा है। हालांकि, भारत को अपना संयम नहीं खोना चाहिए। हमें बांग्लादेश के साथ वैसा ही व्यवहार जारी रखना चाहिए जैसा हम हमेशा से करते आए हैं, साथ ही उन्हें यह याद दिलाना चाहिए कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा अस्वीकार्य है।"
पूर्व राजनयिक त्रिपाठी कहते हैं, "बांग्लादेश अपनी बुनियादी जरूरतों, विशेषकर बिजली और पानी, को पूरा करने में असमर्थ है। पाकिस्तान भले ही चावल या चीनी की कुछ आपूर्ति कर सकता है, लेकिन अपनी संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था के कारण वह लंबे समय तक इस सहायता को बनाए नहीं रख सकता। हमने पहले भी ऐसी ही परिस्थितियाँ देखी हैं।"
समुद्री व्यापार पर:
उन्होंने कहा, "भारत को यहां कोई बड़ी चिंता नहीं है। हमारे पास पहले से ही निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में मज़बूत रक्षा ठिकाने हैं। इसके अलावा, भारत के व्यापार की तुलना में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच होंने वाले व्यापार की मात्रा बहुत कम है।"
जे.के. त्रिपाठी ने जोर देकर कहा, "व्यापारिक आंकड़ों के अलावा, बांग्लादेश बिजली, पानी और अन्य आवश्यक आपूर्ति के लिए भी भारत पर बहुत अधिक निर्भर है। वे पाकिस्तान या चीन से बिजली आयात नहीं कर सकते क्योंकि भारत दोनों देशों के बीच में स्थित है। म्यांमार में भी बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति करने की क्षमता नहीं है। समय के साथ साथ बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के महत्व को भलीभांति समझ जाएगा।"
आर्थिक हितों की सुरक्षा पर:
पूर्व राजनयिक त्रिपाठी ने कहा, "बांग्लादेश के साथ, भारत को सावधानी से आगे बढ़ने की जरूरत है। क्षेत्र के कई छोटे देश प्रायः भारत के सामने खुद को कमजोर महसूस करते हैं, जिससे "बिग ब्रदर सिंड्रोम" की स्थिति उत्पन्न होती है। इन देशों को कभी-कभी लग सकता है कि भारत उन पर हावी होने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, छोटी-छोटी रियायतें देकर और स्थिर दृष्टिकोण बनाए रखकर, भारत अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रख सकता है।"