निजी कंपनियों ने भी इस साल कुल 15233 करोड़ रुपए का निर्यात किया है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर आशा जताई है कि वर्ष 2029 तक भारत का रक्षा निर्यात 50000 करोड़ रुपए हो जाएगा।
भारत लंबे अरसे से विश्व में हथियारों का सबसे बड़ा आयातक रहा है और अपनी रक्षा के लिए विदेश पर ही निर्भर रहा है। पिछले दशक से भारत ने हथियारों के आयातक से निर्यातक बनने की दिशा में गंभीरता से प्रयास शुरू किए थे।
रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि इस वर्ष भारत ने विश्व के 80 देशों को गोला-बारूद, हथियार, विभिन्न प्रकार की प्रणालियाँ एवं उनके कल-पुर्जे निर्यात किये।
रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने निर्यात की अनुमति देने के लिए एक अलग पोर्टल बनाया है जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1762 निर्यात अनुमतियां प्रदान की गईं। निर्यात को आकर्षक बनाने के लिए भारत सरकार ने उद्योगों के लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को सरल किया है।
रक्षा उपकरणों के हिस्से-पुर्ज़ों को लाइसेंस के दायरे से बाहर किया गया है और लाइसेंस की वैधता के समय को बढ़ाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने पिछले कई सालों में उन उपकरणों की सूची जारी की है जिन्हें अब केवल भारतीय कंपनियों से ही खरीदा जा सकता है।
निजी कंपनियों में इन सुधारों से उत्साह आया है और वे रक्षा उपकरणों के उत्पादन और निर्यात में तेज़ी से भाग ले रही हैं। खासतौर पर एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देश भारतीय रक्षा उत्पादों में रुचि दिखा रहे हैं।
भारत और रूस के सहयोग से बनी ब्रह्मोस मिसाइल को फिलीपींस को निर्यात किया गया है और कई अन्य देश उसमें रुचि दिखा रहे हैं। भारत ने आर्मीनिया को मल्टी बैरल रॉकेट लांचर पिनाका और स्वदेशी तोप निर्यात की है। आर्मीनिया को आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम भी निर्यात किया गया है।