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ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद: तकनीक से सैन्य श्रेष्ठता की ओर भारत

7 मई 2025 की सुबह 1.05 बजे भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादियों के मुख्य ठिकानों पर आक्रमण किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच अगले 4 दिन तक संघर्ष चलता रहा।
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इस संघर्ष के एक साल में भारतीय सेना ने खुद को बड़े स्तर पर बदला है ताकि भविष्य में कम समय तक चलने वाले तीव्र युद्धों के लिए तैयार रहा जा सके। एक साल में भारतीय सेना ने अपनी एयर डिफेंस, ड्रोन युद्धकला, इलेक्ट्रॉनिक युद्धकला में सबसे नई तकनीक अपनाई हैं।
ऑपरेशन सिंदूर मुख्य रूप से हवाई युद्ध था जिसमें ड्रोन और मिसाइलों का मुख्य रूप से प्रयोग किया गया। भारत की युद्ध नीति में मुख्य रूप से लगातार गुप्तचरी और निगरानी, सटीक हवाई आक्रमण, लॉइटरिंग अस्त्र प्रणालियां और केन्द्रित कमान और नियंत्रण की प्रधानता थी। इसी वर्ष 5 मई को ही ऑपरेशन सिंदूर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तकनीक आधारित सैनिक श्रेष्ठता का उदाहरण कहा है।
पिछले एक वर्ष में भारतीय सेनाएं आधुनिक तकनीक पर आधारित सैन्य शक्ति बनने का नवीनीकरण तेजी से कर रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद 6 फास्ट ट्रैक सौदे किए गए हैं जो सेनाओं को नई तकनीक के अस्त्र-शस्त्र देने के लिए हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में रक्षा बजट में रिकॉर्ड 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इसे बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ किया गया जिसमें 1.85 लाख करोड़ नए अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्रों के लिए है।
नए सौदों में ड्रोन, मानव रहित विमान, अत्याधुनिक युद्धक विमान, सबमरीन प्रमुख होंगे। वैश्विक राजनीति के कारण अस्त्रों की आपूर्ति में बाधा न आए इसलिए 75 प्रतिशत सौदे स्वदेशी रक्षा उद्योग से किए जाएंगे। हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए रूस के साथ एस-400 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम के पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन का सौदा किया गया।
पैदल सेना की हर बटालियन में एक अश्नि प्लाटून बनाई जा रही है जो ड्रोन युद्ध में विशेषज्ञ होगी। तोपखाने में लॉइटरिंग म्यूनिशन और ड्रोन के लिए अलग रेजीमेंट बन रही है। कम समय में तीव्र गति से होने वाली सैनिक मुठभेड़ों के लिए विशेष भैरव कमांडो बटालियनें बन रही है जिन्हें तेज़ गति के वाहन दिए जा रहे हैं। तालमेल के साथ युद्ध करने के लिए रुद्र ब्रिगेड बनाई जा रही हैं जिनमें पैदल सेना, तोपखाना, टैंक, सिग्नल और हेलीकॉप्टर जैसे सभी अंग हैं।
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