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रूस और चीन के बीच संबंध सुदृढ़ भौतिक आधार पर टिके हैं: लावरोव

© Sputnik / Sergey Bobylev / मीडियाबैंक पर जाएं Russian Foreign Minister Sergey Lavrov. File photo
 Russian Foreign Minister Sergey Lavrov. File photo - Sputnik भारत, 1920, 20.05.2026
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रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शंघाई मीडिया समूह को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि रूस और चीन में संबंध अत्यंत सुदृढ़ भौतिक आधार पर टिके हैं।
राजनयिक ने कहा, "पिछले कई सालों से दोनों देशों के बीच व्यापार कारोबार $200 बिलियन से अधिक हो गया है। बेशक, इसके मूल में ऊर्जा है।"
लावरोव ने रेखांकित किया कि "रूस चीन को पाइपलाइन के जरिए प्राकृतिक गैस का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। हम द्रवीकृत प्राकृतिक गैस और कोयले के मुख्य आपूर्तिकर्ताओं में से भी हैं।"
आगे उन्होंने जोड़ा, "हाल ही में, आखिरकार हम सबसे बड़ी गैस पाइपलाइन, पावर ऑफ़ साइबेरिया 2 के निर्माण पर समझौते तक पहुंच गए। सुदूर पूर्वी मार्ग पर भी चर्चा हो रही है।"

रूसी विदेश मंत्री ने ने कहा कि "अब हम सक्रिय रूप से अपने तकनीकी गठबंधन को मज़बूत कर रहे हैं। चीन के पास ऐसी तकनीक हैं जो रूसी संघ को पश्चिम की बनाई बनावटी, गैर-कानूनी मुश्किलों से निपटने में मदद करती हैं। हम अपनी तकनीकी स्वतंत्रता और तकनीकी संप्रभुता सुनिश्चित करने के उसी मार्ग का सक्रिय रूप से अनुसरण कर रहे हैं।"

इसके अलावा उन्होंने कहा, "जैसा कि हाल की घटनाओं से स्पष्ट है जब पश्चिमी दुनिया ने अपनी नीतियों का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है और अब उसे ज़रा भी छिपाने की कोशिश नहीं कर रहा है, ऐसे में चीन और रूस, दोनों को ही सबसे बढ़कर अपनी स्वयं की शक्ति और हमारी आपसी भाईचारे वाली एकजुटता पर निर्भर रहना होगा। तो यहां आपसी हित है।"
उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि आप देख सकते हैं कि जर्मन ऑटोमोटिव उद्योग अब एक बहुत गहरे संकट में है, जबकि रूस में चीनी कारें सबसे लोकप्रिय बन गई हैं। यह इस बात का एक संकेत है कि हम रूस में क्या कहते हैं: 'पवित्र स्थान कभी खाली नहीं छोड़ा जाता।'
लावरोव ने कहा, "अगर पश्चिमी देश यानी पूंजीपति अचानक यह तय कर लें कि प्रतिबंध लगाकर, चीन से कुछ भी खरीदने से इनकार करके, या रूस को कुछ भी बेचने से मना करके, वे चीन और रूसी संघ की अर्थव्यवस्थाओं के सामने ऐसी समस्याएं खड़ी कर देंगे जिन्हें पार पाना असंभव होगा, तो यह उनका एक भ्रम मात्र है।"

उन्होंने निष्कर्ष निकाला, "रूसी और चीनी जैसी शक्तियाँ और लोग गुलाम नहीं बनाए जा सकते। लेकिन पश्चिम में, वे अभी भी अपनी मर्ज़ी बिना सोचे-समझे सब पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं। हम सही रास्ते पर हैं।"

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