https://hindi.sputniknews.in/20260703/bhaaritiiy-senaaon-ke-lie-52000-kriod-riupe-ke-rikshaa-saudon-kii-sviikti-11502335.html
भारतीय सेनाओं के लिए 52000 करोड़ रुपए के रक्षा सौदों की स्वीकृति
भारतीय सेनाओं के लिए 52000 करोड़ रुपए के रक्षा सौदों की स्वीकृति
Sputnik भारत
भारतीय रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय सेनाओं के लिए लगभग 52000 करोड़ रुपए के रक्षा सौदों को स्वीकृति दी है। 03.07.2026, Sputnik भारत
2026-07-03T19:24+0530
2026-07-03T19:24+0530
2026-07-03T19:24+0530
डिफेंस
भारत
रक्षा मंत्रालय (mod)
भारत के रक्षा मंत्री
भारतीय सेना
भारतीय नौसेना
भारतीय वायुसेना
दिल्ली
कामिकेज़ ड्रोन
ड्रोन
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e9/03/04/8828820_0:0:1200:675_1920x0_80_0_0_c2687056787614074dcb4fcee029bdb3.jpg
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय बैठक संपन्न हुई। रक्षा मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस बैठक में सेना की ताकत बढ़ाने के लिए कई बड़े रक्षा सौदों को हरी झंडी दी गई है। आकाश तरंग प्रणाली सेना के ठिकानों को ड्रोन हमलों से बचाने में कारगर सिद्ध होगी। वहीं टैंक रोधी मिसाइलों से पैदल सेना को शत्रु के टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों से निपटने में सहायता मिलेगी। बहुत कम दूरी से शत्रु के हवाई हमले का मुक़ाबला करने वाले एयर डिफेंस सिस्टम V-SHORADS में कई तरह के संवेदी उपकरण लगे हैं जिससे शत्रु के हेलीकॉप्टर या ड्रोन हमलों को अंतिम बिंदु पर रोका जा सकता है। भारतीय सेना लंबे अरसे से रूसी मूल की इगला मिसाइल का प्रयोग इस तरह के बचाव के लिए करती रही है। भारतीय वायुसेना के लिए ऊंचाई पर काम करने वाले छद्म उपग्रह खरीदे जाएंगे जिससे लगातार निगरानी, चौकसी और टोह लेने का काम किया जा सकेगा। भारतीय नौसेना के लिए भी युद्धपोत से उड़ने वाले ड्रोन खरीदे जाएंगे जिनसे निगरानी, चौकसी करने का काम किया जाएगा। नौसेना के लिए सतह पर लगाई जा सकने वाली बारूदी सुरंगे खरीदी जाएंगी जिससे शत्रु के आवागमन को नियंत्रित किया जा सकेगा।
https://hindi.sputniknews.in/20260703/bhaaritiiy-riaaidris-kaa-bdaa-mishn-maasko-se-vlaadivostok-tk-kaa-motrisaaikil-abhiyaan-shuriuu-11499973.html
भारत
दिल्ली
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
2026
कृष्णमोहन मिश्रा
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e8/05/14/7409018_0:0:486:485_100x100_80_0_0_7e79ffa0ba84a7bd46685bfea1e9d1aa.jpg
कृष्णमोहन मिश्रा
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e8/05/14/7409018_0:0:486:485_100x100_80_0_0_7e79ffa0ba84a7bd46685bfea1e9d1aa.jpg
खबरें
hi_IN
Sputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e9/03/04/8828820_150:0:1050:675_1920x0_80_0_0_d2db247ad58197cec20d529bfcd1ae7e.jpgSputnik भारत
feedback.hindi@sputniknews.com
+74956456601
MIA „Rossiya Segodnya“
कृष्णमोहन मिश्रा
https://cdn1.img.sputniknews.in/img/07e8/05/14/7409018_0:0:486:485_100x100_80_0_0_7e79ffa0ba84a7bd46685bfea1e9d1aa.jpg
भारत, रक्षा मंत्रालय (mod), भारत के रक्षा मंत्री, भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, दिल्ली , कामिकेज़ ड्रोन, ड्रोन, ड्रोन हमला
भारत, रक्षा मंत्रालय (mod), भारत के रक्षा मंत्री, भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, दिल्ली , कामिकेज़ ड्रोन, ड्रोन, ड्रोन हमला
भारतीय सेनाओं के लिए 52000 करोड़ रुपए के रक्षा सौदों की स्वीकृति
भारतीय रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय सेनाओं के लिए लगभग 52000 करोड़ रुपए के रक्षा सौदों को स्वीकृति दी है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय बैठक संपन्न हुई। रक्षा मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस बैठक में सेना की ताकत बढ़ाने के लिए कई बड़े रक्षा सौदों को हरी झंडी दी गई है।
इसके तहत अब सेना के लिए ड्रोन रोधी इलेक्ट्रॉनिक वारफ़ेयर सिस्टम आकाश तरंग और कंधे से दागी जाने वाली टैंक रोधी मिसाइलों (MPATGM) की खरीद की जाएगी। साथ ही, मध्यम दूरी की मिसाइल (MRSAM), कम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) और आत्मघाती ड्रोन सिस्टम खरीदने पर भी सहमति बन गई है।
आकाश तरंग प्रणाली सेना के ठिकानों को ड्रोन हमलों से बचाने में कारगर सिद्ध होगी। वहीं टैंक रोधी मिसाइलों से पैदल सेना को शत्रु के टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों से निपटने में सहायता मिलेगी।
बहुत कम दूरी से शत्रु के हवाई हमले का मुक़ाबला करने वाले एयर डिफेंस सिस्टम V-SHORADS में कई तरह के संवेदी उपकरण लगे हैं जिससे शत्रु के हेलीकॉप्टर या ड्रोन हमलों को अंतिम बिंदु पर रोका जा सकता है।
भारतीय सेना लंबे अरसे से रूसी मूल की इगला मिसाइल का प्रयोग इस तरह के बचाव के लिए करती रही है।
ड्रोन युद्धकला में ज्यादा शक्तिशाली बनने के लिए आत्मघाती ड्रोन खरीदे जाएंगे जो कम मूल्य में शत्रु पर घातक प्रहार करने का सामर्थ्य देंगे।
भारतीय वायुसेना के लिए ऊंचाई पर काम करने वाले छद्म उपग्रह खरीदे जाएंगे जिससे लगातार निगरानी, चौकसी और टोह लेने का काम किया जा सकेगा। भारतीय नौसेना के लिए भी युद्धपोत से उड़ने वाले ड्रोन खरीदे जाएंगे जिनसे निगरानी, चौकसी करने का काम किया जाएगा। नौसेना के लिए सतह पर लगाई जा सकने वाली बारूदी सुरंगे खरीदी जाएंगी जिससे शत्रु के आवागमन को नियंत्रित किया जा सकेगा।