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भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदेगा इंडोनेशिया, मोदी-सुबियांतो बैठक में अहम घोषणा

© AP Photo / Manish SwarupIndian Army soldiers display Unified rocket launcher systems and Brahmos missiles during the Republic Day parade celebrations in New Delhi, India, Monday, Jan. 26, 2026.
Indian Army soldiers display Unified rocket launcher systems and Brahmos missiles during the Republic Day parade celebrations in New Delhi, India, Monday, Jan. 26, 2026.  - Sputnik भारत, 1920, 07.07.2026
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भारत और इंडोनेशिया के बीच सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस सौदे का महत्वपूर्ण समझौता हो गया है। ब्रह्मोस के अतिरिक्त भारत निर्मित हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल को लेकर भी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इंडोनेशिया अब फिलीपींस और वियतनाम के बाद तीसरा देश बन जाएगा जो ब्रह्मोस मिसाइल खरीदेगा। ब्रह्मोस का विकास और उत्पादन भारत और रूस मिलकर करते हैं।
इससे पहले जनवरी 2022 में फिलीपींस ने ब्रह्मोस की 3 बैटरी खरीदने का समझौता किया था। इनमें से दो बैटरी फिलीपींस को मिल चुकी हैं और तीसरी भेजी जाने के लिए तैयार है। इसी वर्ष 31 मई को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने जानकारी दी थी कि वियतनाम को ब्रह्मोस निर्यात करने का सौदा हो चुका है, हालांकि इसके विवरण अभी साझा नहीं किए गए हैं।
ब्रह्मोस पिछले दो दशक से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में प्रयोग किया जा रहा है। भारतीय सेना में ब्रह्मोस के सतह से सतह पर मार करने वाले अलग-अलग संस्करणों की चार रेजिमेंट तैनात हैं।
भारतीय नौसेना के लगभग सभी प्रमुख युद्धपोतों को पोत रोधी और शत्रु के ज़मीनी ठिकानों पर हमला करने वाली ब्रह्मोस से लैस किया जा रहा है। भारतीय वायुसेना ने अपने 40 सुखोई-30 लड़ाकू विमानों को ब्रह्मोस से लैस करके तैनात किया है।
ब्रह्मोस की प्रारंभिक रेंज 290 किमी थी जिसे बढ़ाकर 800 किमी तक किया जा चुका है। इसे बढ़ाकर 1500 किमी तक करने पर काम चल रहा है। ब्रह्मोस की अगली पीढ़ी की मिसाइल यानी ब्रह्मोस-एनजी भी विकास के चरण में है। इस मिसाइल का वजन केवल 1.5 टन होगा और इसकी गति को 3.5 मैक तक किया जाएगा।
पिछले वर्ष मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में ब्रह्मोस के प्रहार से पाकिस्तान के 11 एयरबेस नष्ट हो गए थे। इस संघर्ष में ब्रह्मोस की सफलता के बाद विश्व के कई देश ब्रह्मोस खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।
भारत और इंडोनेशिया के बीच में हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र को लेकर भी समझौता हुआ है। भारत में विकसित अस्त्र-1 की रेंज 110 किमी है जिसे सुखोई और तेजस में लगाया जा चुका है। अस्त्र-2 की रेंज 240 किमी तक है जिसको लड़ाकू विमानों में लगाया जाना प्रारंभ हो चुका है। भविष्य में इसकी रेंज को बढ़ाकर 350 किमी तक किया जाएगा।
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