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रूस का नया सैटेलाइट अंतरिक्ष में पर्यावरण-अनुकूल रॉकेट ईंधन का करेगा परीक्षण
रूस का नया सैटेलाइट अंतरिक्ष में पर्यावरण-अनुकूल रॉकेट ईंधन का करेगा परीक्षण
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रेशेत्नेव साइबेरियाई विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और केल्डिश अनुसंधान केंद्र ने एक नैनो सैटेलाइट, रेशयूक्यूब-4, विकसित करने जा रहे हैं जो अंतरिक्ष में बेहतर और पर्यावरण के लिए सुरक्षित रॉकेट ईंधन तकनीक का परीक्षण करेगा।
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रेशेत्नेव साइबेरियाई विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और केल्डिश अनुसंधान केंद्र मिलकर एक नैनो सैटेलाइट, रेशयूक्यूब-4, विकसित करने जा रहे हैं जो अंतरिक्ष में बेहतर और पर्यावरण के लिए सुरक्षित रॉकेट ईंधन तकनीक का परीक्षण करेगा।इस परियोजना के प्रमुख दिमित्री ज़ुएव ने Sputnik को बताया कि इसके लॉन्च की योजना 2027 के आखिर में है। उन्होंने आगे कहा कि कक्षा में पहुंचने के बाद टीमें मिलकर प्रणोदन से जुड़े प्रयोग करेंगी।
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रूस का नया सैटेलाइट अंतरिक्ष में पर्यावरण-अनुकूल रॉकेट ईंधन का करेगा परीक्षण
13:45 21.08.2026 (अपडेटेड: 13:59 21.08.2026) छोटे उपग्रहों को अपनी तय कक्षा में बने रहने के साथ-साथ समय से पहले वापस आने से बचाने और कक्षा में अंतरिक्ष में दिशा और स्थिति बदलने के लिए रॉकेट इंजन की जरूरत होती है।
रेशेत्नेव साइबेरियाई विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और केल्डिश अनुसंधान केंद्र मिलकर एक नैनो सैटेलाइट, रेशयूक्यूब-4, विकसित करने जा रहे हैं जो अंतरिक्ष में बेहतर और पर्यावरण के लिए सुरक्षित रॉकेट ईंधन तकनीक का परीक्षण करेगा।
इस परियोजना के प्रमुख दिमित्री ज़ुएव ने Sputnik को बताया कि इसके
लॉन्च की योजना 2027 के आखिर में है।
प्रमुख दिमित्री ज़ुएव ने कहा, "केल्डिश टीम के साथ डॉकिंग परीक्षण के लिए एक मास-डाइमेंशनल मॉडल तैयार है। शुरुआती जांच के लिए उपग्रह में रॉकेट इंजन पहले ही लगा दिया गया है। प्रणाली में वाइब्रेशन और वैक्यूम परीक्षण किए जाएंगे ताकि यह प्रमाणित किया जा सके कि यह अंतरिक्ष जैसे हालात में काम कर सकता है। फिर सैटेलाइट को जोड़कर इंजन लगाया जाएगा और अंतरिक्ष यान को लॉन्च के लिए तैयार किया जाएगा।"
उन्होंने आगे कहा कि कक्षा में पहुंचने के बाद टीमें मिलकर
प्रणोदन से जुड़े प्रयोग करेंगी।
ज़ुएव कहते हैं, "यह परियोजना छात्रों और युवा वैज्ञानिकों को सीधे विकास की प्रक्रिया में भी शामिल करती है, जिसमें अभियान के डेटा का इस्तेमाल भविष्य की अंतरिक्ष-तकनीक प्रशिक्षण के क्षेत्र में किया जाएगा।"